गोविन्द पोद्दार / कुशेश्वरस्थान पूर्वी दरभंगा :-

शारदीय नवरात्र के चौथे दिन रविवार को दोनों प्रखंड क्षेत्र में श्रद्धा पूर्वक माँ दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा व अर्चना भक्ति भाव के साथ वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ कि गई। अहले सुबह से ही विभिन्न मंदिरों एवं पूजा पंडालों में भक्तों कि भीड़ उमड़ी पड़ी थी। भक्तों नें माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप कूष्मांडा कि पूजा अर्चना कर अपने अपने स्वजनों के सुखमय जीवन कि कामना किया।
सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व जब चारों ओर अंधकार था और कोई भी जीव जंतु नहीं था तो मां दुर्गा ने इस अंड यानी ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। सृष्टि की उत्पत्ति करने के कारण इन्हें आदिशक्ति नाम से भी अभिहित किया जाता है। पंडित आचार्य राज नारायण झा।
उन्होंने नें बताया कूष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़े। मां को बलियों में कुम्हड़े की बलि सबसे ज्यादा प्रिय है। इसलिए इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है। कूष्मांडा देवी की आठ भुजाएं जिनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। इधर ज्यों ज्यों शारदीय नवरात्र की तिथि बीतती जा रही है। क्षेत्र में भक्ति का माहौल दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। गांव गांव में ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर मंदिरों, देवालयों एवं लोगों के कुल देवता के निकट कहीं दुर्गा सप्तशती के पाठ से तो कहीं देवी के गीत एवं वंदना के वाचन से वातावरण गुंजायमान हो रहा है। दुर्गा मंदिरों एवं पूजा पंडालों को सजाने संवारने का काम जोरो पर है।























