हालात अनवरत रही तो घर द्वार भूमाफियाओं के हाथों में औंने पौने मूल्य पर बेंचकर पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे लोग
वीरेंद्र चौहान, नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज,14 मार्च।
किशनगंज नगर परिषद क्षेत्र के मोतीबाग वार्ड संख्या 7 के आवासीय इलाके में भूमाफियाओं के इशारे पर नगर परिषद क्षेत्र का कचरा डंप किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ही नहीं अपितु मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रारंभिक एक दशक में मोतीबाग मोहल्ला नगर परिषद क्षेत्र के कचरे से मुक्त था। विधानसभा में इस मामले को उठाने की साहस पूर्व विधायक इजहारुल हुसैन नहीं जुटा सके। वर्तमान विधायक कमरुल होला से उम्मीद है कि वे मोतीबाग की विधानसभा में उठाएंगे।कचरा डंप करने के पीछे भूमाफियाओं का षड्यंत्र माना जा रहा है। यही स्थिति बरकरार रही तो औने-पौने मूल्य पर घर-द्वार बेंचकर मोतीबाग मोहल्ले के निवासी पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे।
मोतीबाग मोहल्ले से क्यों होगा पलायन:
कचरा डंपिंग यार्ड से उठ रहा जहरीला धुआं और दुर्गंध के कारण स्थानीय लोगों का जीवन दूभर हो गया है। वर्षों से यहां जमा कचरे में आग लगने की घटनाएं होती रहीं हैं, जिससे आसपास के इलाकों में लगातार जहरीला धुआं फैल रहा है और लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
किशनगंज, बिहार विधानभा में पूर्व विधायक इजहारुल हुसैन ने नहीं उठाया मोतीबाग मोहल्ले के आवासीय क्षेत्र में सरकार द्वारा कचरा डंप करने का मामला, जिला प्रशासन भी उदासीन
स्थानीय लोगों के अनुसार कचरे के ढेर में लगी आग कई दिनों तक सुलगती रहती है और उससे निकलने वाला धुआं लगभग तीन किलोमीटर तक फैल जाता है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। बरसात का पानी पड़ने के बाद भी कचरे में लगी आग पूरी तरह नहीं बुझती और अंदर ही अंदर सुलगती रहती है। बताया जाता है कि करीब पांच एकड़ क्षेत्र में फैले कचरे के ढेर में आग फैल चुकी है, जिस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरे शहर का कचरा मोतीबाग में डंप किया जाता है और समय-समय पर उसमें आग भी लगा दी जाती है, जिससे उठने वाला घना धुआं और जहरीली गैसें लोगों स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है।
कई लोगों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी, दमा और अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से तंग आकर कुछ लोग मोहल्ला छोड़ चुके हैं, जबकि कई अन्य लोग पलायन करने पर मजबूर हैं।
स्थानीय निवासी एवं हॉस्टल संचालक दिलीप कुमार झा ने बताया कि कई वर्षों से यह समस्या बनी हुई है। धुएं और दुर्गंध के कारण छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
वार्डवासियों का कहना है कि डंपिंग यार्ड के आसपास लगभग 2500 लोगों की आबादी रहती है, जो इस जहरीले धुएं और प्रदूषण से प्रभावित हो रही है। जिससे बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
गौरतलब है कि मोतीबाग वार्ड संख्या 7 में वर्षों से शहर का कचरा और अन्य अवशिष्ट पदार्थ डंप किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार नगर परिषद किशनगंज और जिला प्रशासन को आवेदन देकर समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। वार्डवासियों का आरोप है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।






















