दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज,01जून।
लोकसभा चुनाव 2024 अपने अंतिम चरण में है।लगभग छह हफ़्तों में हुए इस चुनाव के आख़िरी और सातवें चरण के लिए शनिवार यानी 1 जून को मतदान हो रहे हैं।
चार जून को लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ जाएंगे लेकिन उससे पहले आज मीडिया और सोशल एक्टिविस्ट तथा
चुनावी विश्लेषकों और पत्रकारों से सुनने के बाद अनुभव हुआ कि लोकसभा चुनाव में नेताओं के प्रचार से अधिक हकीकत की कहानियों से प्रभावित होकर अधिकांश मतदाताओं ने मतदान किया है। सोशल एक्टिविस्ट राम उजागिर सिंह ने कहा: ये चुनाव पिछले लोकसभा चुनावों से अलग रहा और ज़मीनी सच्चाई मतदान पर हावी रहा, कुछ ऐसा संकेत समझ में आ रहा हैं।
एक सवाल का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा:
2021से 20219 के बीच के काल भारत के आजादी के इतिहास का स्वर्णिम काल था। स्वच्छता अभियान का काल था। वोट देने वाले हर परिवार के पास शौचालय का 12हजार रुपये पहुंचे थे। राजमिस्त्री और कामगारों के पास काम ही काम थे। 100रुपये अधिक देने पर कामगार और मजदूर उपलब्ध नहीं थे। महिलाओं में शौचालय निर्माण को लेकर भारी उत्साह था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की जय-जयकार महिलाएं कर रहीं थीं। 2019 में किसान सम्मान निधि मिलने की खुशी सोने में सुहागा का काम किया था।
वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह राज ने कहा:
मोदी के दूसरे कार्यकाल में 2019 से लेकर आज तक वह उत्साह नहीं दिखा जो 2014से 2019 तक दिख रहा था। 2014से 2024 तक के कार्यकाल को देखकर जो लोग वोटिंग किए हैं, वे उनके मन यह जरूर रहा होगा अच्छा व्यक्ति को वोट देना चाहिए। मुद्दे के आधार पर वोट देना चाहिए। 2014से 2019तक के मोदी कार्यकाल को स्वर्णिम कार्यकाल कहा जाएगा।
सोशल एक्टिविस्ट राम उजागिर सिंह ने कहा, 10वर्ष का शासनकाल बहुत होता है। भाजपा प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बदल देने का साहस दिखाती तो 2019को शानदार तरीके से रिपीट करती।






















