विशेष स्टोरी नजरिया न्यूज़, अररिया। सीमांचल के अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार समेत आसपास के इलाकों में मानव तस्करी का नेटवर्क लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। रोजगार, बेहतर जीवन और शादी का झांसा देकर युवतियों और किशोरियों को दूसरे राज्यों में ले जाने के मामले सामने आते रहे हैं। कई मामलों में पीड़ितों को घरेलू काम, शादी या नौकरी का लालच दिया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें शोषण और जबरन मजदूरी जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मानव तस्करी से जुड़े मामलों में सीमांचल क्षेत्र ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। तस्कर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाते हैं। रोजगार के नाम पर लड़कियों को बाहर भेजने के बाद उनका संपर्क परिजनों से भी सीमित कर दिया जाता है। कई मामलों में फर्जी दस्तावेज और पहचान का सहारा लिए जाने की बात भी सामने आई है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2019, 2020 और 2021 में मानव तस्करी से जुड़े 292 मामले दर्ज हुए थे। वहीं, अलग-अलग कार्रवाई में बड़ी संख्या में बालिकाओं और युवतियों को तस्करी के चंगुल से मुक्त कराया गया है। रिपोर्ट में 728 बालिकाओं और 45 युवतियों के कटिहार में मुक्त कराए जाने का भी उल्लेख है।
अररिया के नरपतगंज क्षेत्र से जुड़े एक तस्कर की गिरफ्तारी वर्ष 2023 में होने की जानकारी भी सामने आई है। इससे स्पष्ट है कि सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में सक्रिय गिरोह रोजगार और शादी के बहाने लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।
मानव तस्करी रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन, रेलवे, एसएसबी और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के साथ संदिग्ध एजेंटों और दलालों पर लगातार निगरानी की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार के लिए बाहर जाने वाले लोगों के सत्यापन और सुरक्षित पलायन की व्यवस्था को मजबूत कर तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
नजरिया न्यूज़ के लिए अररिया से विकास प्रकाश की रिपोर्ट।















