नजरिया / कुशेश्वरस्थान।
माघ मास की मौनी अमावस्या इस वर्ष रविवार को पड़ रही है। रविवार सूर्य देव को समर्पित होता है, ऐसे में इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह तिथि विशेष फलदायी मानी जा रही है। पंडित आचार्य राज नारायण झा के अनुसार, शास्त्रों में मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन स्नान, दान, पूजा, ध्यान और मन की शुद्धि करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन किया गया जप-तप और दान कई गुना पुण्य देने वाला माना गया है। इस वर्ष मौनी अमावस्या पर शिव वास योग और हर्षण योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इन शुभ योगों के कारण यह पर्व और भी कल्याणकारी हो गया है। शिव वास योग भगवान शिव की विशेष कृपा का प्रतीक माना जाता है, वहीं हर्षण योग सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला योग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन मौन रहकर स्नान, ध्यान, पूजन और दान करने से मन की चंचलता शांत होती है और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु प्रातःकाल पवित्र नदी या सरोवर में स्नान कर भगवान शिव और सूर्य देव की पूजा करते हैं। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और कंबल का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। विद्वानों का कहना है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए कर्म जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। मौनी अमावस्या को आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का पर्व माना जाता है। रविवार का संयोग और शुभ योग इसे साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष अवसर बना रहे हैं।























