दरभंगा / कुशेश्वरस्थान।
भगवान श्री राम धर्म के प्रतीक थे। उन्होंने पुत्र धर्म को पालन करने के लिए सभी राजसी सुख सुविधा को त्याग कर पिता के वचन पालन करने के लिए 14 वर्षों के लिए वनवास चले गए। उक्त बातें समौरा दुर्गा हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित श्री राम कथा ज्ञान महायज्ञ में हो रहे राम कथा में अयोध्या से आई विदुषी देवी चंद्रकला ने कही। नौ दिवसीय राम कथा के छठे दिन मंगलवार को देवी चंद्रकला जी ने महाराज दशरथ जी को तीन या पांच पुत्र नहीं होकर चार ही पुत्र क्यों हुए। इस रहस्य को समझाते हुए कहा कि महाराज दशरथ के चारों पुत्र चार पुरुषार्थ के प्रतीक थे। जिसमें राम धर्म के,भरत मोक्ष के, लक्ष्मण काम के तथा शत्रुघ्न को अर्थ का प्रतीक माना गया है। कहा कि राम के साथ लक्ष्मण इसलिए वन गया क्योंकि धर्म के साथ इच्छा यानि काम रहता है। भरत को मोक्ष का प्रतीक इसलिए माना गया है कि वह धर्म की रक्षा के लिए भाई के खड़ाऊं लेकर 14 वर्षों तक भगवान को आने का इंतजार करता रहा। जबकि शत्रुघ्न अयोध्या में ही इसलिए रहे ताकि नगर वासियों को धन धान्य की कोई कमी नहीं हो पाए। इसी तरह महाराज दशरथ जी के तीन रानियां सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण के प्रतीक हैं। सतोगुण से धर्म की उत्पत्ति होती है। इसलिए कौशल्या से प्रभु श्रीराम हुए। रजोगुण से अर्थ और काम की उत्पत्ति होती है। इसलिए सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए। जबकि तमोगुण से मोक्ष की उत्पत्ति होती है। इसलिए केकैयी से भारत हुए। कथा के बीच बीच में प्रसंग आधारित संगीतमय भजन कीर्तन से श्रोता झुमते रहे। अंत में भगवान की आरती के बाद कथा का विश्राम हुआ।





















