- शौचालय एंट्री व जियो टैग के नाम पर अवैध वसूली का आरोप, बीडीओ ने मांगा शो-कॉज
- पंचायत प्रतिनिधियों का दावा- शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से बढ़ी नाराजगी
नजरिया न्यूज। भरगामा (अररिया)।
भरगामा प्रखंड में शौचालय योजना के लाभुकों की ऑनलाइन एंट्री, जियो टैग और अनुदान भुगतान की प्रक्रिया को लेकर कथित अवैध उगाही का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से प्रखंड समन्वयक सीताराम प्रसाद ठाकुर पर लगाए गए आरोपों के बाद अब प्रखंड विकास पदाधिकारी ने उनसे शो-कॉज मांगा है। वहीं पंचायत प्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व प्रखंड प्रमुख दिव्य प्रकाश यादवेंदू ने बताया कि 24 सितंबर को प्रखंड मुख्यालय में पैकपार पंचायत के मुखिया धनंजय सिंह भंटू, रघुनाथपुर उत्तर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि आदित्य कुमार उर्फ लड्डू यादव, खुटहा बैजनाथपुर पंचायत के पंसस प्रतिनिधि सितांशु शेखर पिंटू समेत अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने शौचालय योजना की एंट्री और जियो टैग में कथित अनियमितता तथा उगाही को लेकर अपना पक्ष रखा था। प्रतिनिधियों के बयान के आधार पर मामले को सामने लाया गया। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने को लेकर प्रतिनिधियों में नाराजगी है।
पैकपार पंचायत के मुखिया धनंजय सिंह भंटू ने आरोप लगाया कि उनके पंचायत में शौचालय अनुदान के भुगतान के नाम पर कई लाभुकों से कथित रूप से राशि की मांग की गई। उनका कहना है कि मामले को लेकर शिकायत और खबर प्रकाशित होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
रघुनाथपुर उत्तर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि आदित्य कुमार उर्फ लड्डू यादव ने आरोप लगाया कि कई पंचायतों में कथित रूप से राशि लिए जाने के बाद शौचालय योजना की एंट्री और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। वहीं राशि नहीं देने वाले कई लाभुकों की एंट्री लंबित रहने का उन्होंने आरोप लगाया।
रघुनाथपुर उत्तर पंचायत के उपमुखिया रामबहादुर ठाकुर ने कहा कि शौचालय अनुदान की प्रक्रिया को लेकर पंचायत के कई लाभुकों के साथ वे कई बार स्वच्छता कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं। उनका आरोप है कि एंट्री और भुगतान की प्रक्रिया में लगातार टालमटोल की गई।
जांच कराकर कार्रवाई की मांग
पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शौचालय योजना से जुड़े लाभुकों की ऑनलाइन एंट्री, जियो टैग, भुगतान की स्थिति तथा लंबित मामलों की पंचायतवार जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही यह भी जांच हो कि किसी लाभुक से योजना का लाभ दिलाने के नाम पर राशि तो नहीं ली गई।
इधर, मामले को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा प्रखंड समन्वयक से शो-कॉज मांगे जाने की बात सामने आई है। अब संबंधित अधिकारी के जवाब और प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।














