नजरिया न्यूज़, अररिया। विकाश प्रकाश।
स्थानीय ओम नगर स्थित प्राइम हॉल विवाह भवन परिसर में शनिवार को रामाश्रम सत्संग मथुरा उपकेंद्र अररिया के तत्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय आध्यात्मिक आंतरिक साधना शिविर का शुभारंभ श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। शिविर के प्रथम सत्र में बड़ी संख्या में साधकों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया तथा ध्यान-साधना और सत्संग के महत्व को समझा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अलीगढ़ से पधारे आचार्य देवेंद्र गौर ने कहा कि यदि कोई साधक रामाश्रम सत्संग द्वारा बताए गए नियमों के अनुसार मात्र आठ दिनों तक सुबह और शाम नियमित रूप से ध्यान-साधना करता है, तो उसके जीवन में सुखद और अविस्मरणीय परिवर्तन स्वतः अनुभव होने लगता है। उन्होंने कहा कि सत्संग में बताई गई साधना पद्धति अत्यंत सरल, सहज और व्यावहारिक है, जिसे कोई भी व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में आसानी से अपना सकता है।
आचार्य देवेंद्र गौर ने कहा कि साधना को प्रतिदिन निश्चित समय, निश्चित आसन और पूर्ण अनुशासन के साथ केवल 15 मिनट सुबह और 15 मिनट शाम करने से व्यक्ति को अपने भीतर सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगता है। साधक स्वयं अनुभव करता है कि उसके विचार, व्यवहार और जीवनशैली में शांति, संतुलन और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह साधना व्यक्ति को मानसिक तनाव से दूर कर आत्मिक शांति प्रदान करती है।
शिविर में पटना से आए आचार्य डॉ. ज्योति प्रसाद एवं आचार्य ओम नारायण शर्मा ने भी सत्संग और साधना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल प्रवचन सुनने से नहीं, बल्कि सत्संग की साधना को अपने जीवन में उतारने और उसका नियमित अभ्यास करने से ही वास्तविक अनुभव प्राप्त होता है।
इस अवसर पर अलीगढ़ से आए आचार्य देवेंद्र गौर, पटना से अमरेन्द्र प्रसाद सिन्हा, डॉ. ज्योति प्रसाद, ओम नारायण शर्मा तथा अररिया के आचार्य विनोद प्रसाद ने अपने प्रवचनों के माध्यम से बताया कि समर्थ गुरु द्वारा प्रदत्त रामाश्रम सत्संग अत्यंत सरल और व्यवहारिक मार्ग है, जो व्यक्ति को आत्मिक उन्नति और मानसिक शांति की ओर ले जाता है। आचार्यों ने जीवन में सकारात्मक सोच, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की।






















