- अभिभावक का आरोप: “चार बच्चे पढ़ते हैं, एक को भी नहीं मिला सरकारी लाभ, विरोध किया तो रसूखदारों ने दबाई आवाज”; मुख्यमंत्री से लेकर DM तक पहुंचा मामला।
अररिया/नरपतगंज। शिक्षा के मंदिर में जब ज्ञान की बजाय ‘बाहुबल’ और ‘रसूख’ का सिक्का चलने लगे, तो भविष्य की नींव का डगमगाना लाजमी है। ऐसा ही एक सनसनीखेज और व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय सोनापुर से सामने आया है। शनिवार, 16 मई 2026 समाय 10 बजे, को विद्यालय प्रबंधन समिति (VSS) के गठन के दौरान जो कुछ भी हुआ, उसने शिक्षा विभाग के पारदर्शी दावों की पोल खोल कर रख दी है। इसे ‘अजब का संगठन और गजब की कमेटी’ ही कहा जाएगा, जहां नियमों को ताक पर रखकर, बंद कमरों में रसूखदारों ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया।
इस तानाशाही और धांधली के खिलाफ गांव की एक साहसी महिला और पीड़ित अभिभावक रूमा देवी ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने न केवल इस अवैध चुनाव को चुनौती दी है, बल्कि सीधे सूबे के मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक को लिखित शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
*क्या है पूरा मामला? बंद कमरों में रची गई साजिश!*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को मध्य विद्यालय सोनापुर में विद्यालय प्रबंधन समिति (VSS) के गठन हेतु एक बैठक और लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव होना तय था। नियमतः इस चुनाव में उन अभिभावकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है, जिनके बच्चे विद्यालय में पढ़ते हैं। सुबह से ही गरीब और जरूरतमंद अभिभावक इस आस में स्कूल पहुंचे थे कि वे अपने बीच से एक ईमानदार प्रतिनिधि चुनेंगे।
लेकिन, जैसे ही प्रक्रिया शुरू हुई, गांव के कुछ कथित राजनीतिक रसूख वाले और बड़े जमींदार वर्ग के लोगों ने अपने बाहुबल के दम पर पूरी व्यवस्था को बंधक बना लिया। चश्मदीदों के मुताबिक, बिना किसी नियम, कानून या पारदर्शिता के, रसूखदारों ने अपनी मर्जी से मनमाने ढंग से समिति के सदस्यों की सूची तैयार कर ली और उसे ही अंतिम फैसला घोषित कर दिया। गरीब अभिभावक मूकदर्शक बने रहने को मजबूर हो गए।
*रूमा देवी की आपबीती: “चार-चार बच्चे पढ़ते हैं, पर सौतेला व्यवहार होता है”*
इस धांधली के खिलाफ डटकर खड़ी होने वाली श्यामनगर (पोस्ट: सोनापुर) निवासी रूमा देवी (पति: श्री साधन यादव) ने रोते और आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि उनके चार बच्चे इसी विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं:
स्वर्ण राजकुमार (कक्षा 3)
हंसराज कुमार (कक्षा 3)
स्नेहा कुमारी (कक्षा 5)
मिलन कुमारी (कक्षा 8)
“मेरे चार-चार बच्चे इस स्कूल में हर दिन जाते हैं, लेकिन आज तक उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ ठीक से नहीं मिला। विद्यालय प्रशासन और रसूखदारों द्वारा मेरे बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। जब आज चुनाव के नाम पर नाटक हो रहा था, तो मैंने अपनी नाराजगी जताई। लेकिन हम गरीबों की सुनने वाला वहां कोई नहीं था। रसूखदार लोग समिति पर अवैध कब्जा करना चाहते हैं ताकि स्कूल के फंड का बंदरबांट कर सकें।”
—* रूमा देवी, पीड़ित अभिभावक*
*डिजिटल माध्यम से न्याय की गुहार: मुख्यमंत्री से लेकर DM-DEO को भेजा पत्र*
स्थानीय स्तर पर जब रूमा देवी की शिकायत को रसूखदारों के दबाव में अनसुना कर दिया गया, तो उन्होंने हार नहीं मानी। एक जागरूक नागरिक की तरह उन्होंने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। रूमा देवी ने तत्काल मुख्यमंत्री, बिहार सरकार को ईमेल के माध्यम से अपना शिकायती आवेदन भेजा।
इसके साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी (DM) अररिया, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) अररिया, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) नरपतगंज, और प्रखंड MDM प्रभारी को व्हाट्सएप (WhatsApp) एवं अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से त्वरित आवेदन भेजकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
*शिकायत पत्र के मुख्य अंश: व्यवस्था पर तीखे सवाल*
*रूमा देवी द्वारा वरीय अधिकारियों को भेजे गए आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है:*
“आज दिनांक 16/05/2026 को विद्यालय में आयोजित शिक्षा समिति की बैठक में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव होने के बजाय, गांव के कुछ रसूखदार और बड़े जमींदार वर्ग के लोगों ने अपने निजी स्वार्थ और बाहुबल के कारण पूरी चुनाव प्रक्रिया को बाधित कर दिया। यह हम जैसे गरीब, योग्य और जरूरतमंद अभिभावकों के अधिकारों का सीधा हनन है। यदि ऐसे रसूखदार लोग समिति पर अवैध कब्जा कर लेंगे, तो विद्यालय के विकास और बच्चों के भविष्य पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा।”
*अभिभावकों की मांगें:*
आज हुए मनमाने और अवैध चुनाव को तत्काल रद्द किया जाए।
जिला प्रशासन की प्रत्यक्ष देखरेख में दोबारा पारदर्शी, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराया जाए।
विद्यालय में हो रहे पक्षपात और बच्चों के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार की जांच हो।
*आखिर कब सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था?*
यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी सुदूर ग्रामीण इलाके के सरकारी स्कूल में शिक्षा समिति के चुनाव में बाहुबल का नंगा नाच देखा गया हो। विद्यालय प्रबंधन समिति (VSS) का गठन इसलिए किया जाता है ताकि स्थानीय अभिभावक स्कूल की गतिविधियों पर नजर रख सकें और मध्याह्न भोजन (MDM) से लेकर विकास कोष के पैसों का सही इस्तेमाल हो सके। लेकिन जब इस समिति पर ही ‘रसूखदारों’ का अवैध कब्जा हो जाएगा, तो गरीब बच्चों को मिलने वाली थाली का भात और उनके हिस्से की किताबें सुरक्षित कैसे रहेंगी?
इस मामले में अब गेंद जिला प्रशासन अररिया और शिक्षा विभाग के पाले में है। देखना यह है कि क्या एक गरीब मां की चीख पटना और अररिया के वातानुकूलित कमरों में बैठे साहबों के कानों तक पहुंचती है या फिर इस ‘गजब की कमेटी’ के रसूख के आगे व्यवस्था घुटने टेक देती है। इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी से जब दूरभाष पर संपर्क करना चाहत हो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। अब देखा यह होगा कि पूरे प्रकरण में जांच की प्रक्रिया प्रशासन के तरफ से कैसा रुख अपनाती है क्या न्याय मिलेगा एक परिवार को।
ब्यूरो रिपोर्ट, अररिया।






















