मुजफ्फरपुर। 13 मई
देश से कालाजार के पूर्ण खात्मे के संकल्प को परखने के लिए बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय टीम मुजफ्फरपुर पहुंची। इस टीम में एनवीडीबीडीसी (भारत सरकार) की एडिशनल डायरेक्टर डॉ. छवि पंत और डब्ल्यूएचओ की नेशनल कोआर्डिनेटर (कालाजार डोजियर) डॉ. पालिका सिंह शामिल थीं। टीम ने जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
पारू पीएसी में डोजियर की बारीकी से जांच:
केंद्रीय टीम सबसे पहले पारू प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) पहुंची। यहाँ डॉ. छवि पंत और डॉ. पालिका सिंह ने साल 2018 से अब तक के कालाजार से संबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स और डोजियर की सघन जांच की। टीम ने मरीजों के फॉलो-अप, दवा की उपलब्धता और इलाज के रिकॉर्ड को देखा। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि डेटा मैनेजमेंट में किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए।
छाप गांव में आईआरएस छिड़काव का लिया फीडबैक:
क्षेत्र भ्रमण के दौरान टीम पारू के छाप गांव पहुंची। यहाँ अधिकारियों ने सीधे ग्रामीणों से संवाद किया और आईआरएस छिड़काव की जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि क्या छिड़काव कर्मियों ने घर के हर कोने में दवा का छिड़काव किया है। डॉ. पालिका सिंह ने इस दौरान कालाजार प्रोग्राम का रिव्यू किया और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को इनपुट दिए कि कैसे इस प्रोग्राम को लास्ट माइल (अंतिम चरण) तक सफलतापूर्वक पहुंचाया जाए।
सदर अस्पताल और केएमआरसी का निरीक्षण:
ग्रामीण क्षेत्रों के बाद टीम सदर अस्पताल पहुंची, जहाँ उन्होंने आरके-39 जांच किट की उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता को देखा। इसके बाद टीम केएमआरसी भी गई। निरीक्षण के दौरान टीम ने स्पष्ट किया कि कालाजार के संदिग्ध मरीजों की पहचान और त्वरित इलाज ही इस बीमारी को जड़ से मिटाने का एकमात्र रास्ता है।
”कालाजार प्रोग्राम अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। सूक्ष्म निगरानी और शत-प्रतिशत आईआरएस से ही हम इस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।”
इस पूरे भ्रमण के दौरान डीएमओ डॉ. राकेश कुमार और डब्ल्यूएचओ की डॉ. माधुरी देवराजू साथ रहीं, जिन्होंने टीम को जिले की प्रोग्रेस से अवगत कराया।
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