नजरिया न्यूज़, पटना।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा दिनांक 01 मई, 2026 को पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड अंतर्गत सिल्हौरी-बिल्हौरी पंचायत के सिल्हौरी गांव में “संतुलित उर्वरक उपयोग एवं प्राकृतिक खेती” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, रासायनिक उर्वरकों के सीमित एवं संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके स्थान पर जैविक एवं प्राकृतिक उपायों को अपनाकर न केवल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है, बल्कि उत्पादन लागत को भी कम किया जा सकता है।
इस दौरान किसानों के बीच ढैंचा बीज का वितरण किया गया तथा उन्हें हरी खाद के रूप में ढैंचा के उपयोग के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। किसानों को प्रेरित किया गया कि वे खेतों में ढैंचा उगाकर उसे मिट्टी में मिलाएं, जिससे भूमि की उर्वरता में वृद्धि होगी और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होगी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग की टीम द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. रजनी कुमारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, श्री अभिषेक कुमार, प्रक्षेत्र प्रबंधक, श्री प्रेम पाल कुमार एवं अन्य सदस्य शामिल थे। इस अवसर पर कुल 24 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 20 पुरुष एवं 4 महिला किसान शामिल थीं।
कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग पर भी बल दिया गया। अंत में किसानों ने अपने खेतों में संतुलित उर्वरक उपयोग एवं हरी खाद अपनाने का संकल्प लिया।
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