किशनगंज, बिहार – तीन लाख चार हजार से अधिक जीविका दीदीयों को दी गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना मद से राशि
पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम, हस्तनिर्मित उत्पाद जीविका दीदियां अजमा रहीं हैं हाथ
वीरेंद्र चौहान नजरिया न्यूज, किशनगंज, 23 फरवरी।
महिलाओं के आत्मनिर्भर और सशक्त होने से पूरा परिवार मजबूत होता है. घर में खुशहाली आती है. इस दिशा में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना किशनगंज जिला की जीविका दीदियों के आर्थिक स्वावलंबन का आधार बन रहा है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत प्रत्येक परिवार के एक महिला सदस्य के बैंक खाते में दस हजार रुपये की राशि अंतरण की गई है. इस राशि से वे किराना, मनिहारा, सब्जी, कपड़ा सिलाई, चाय – नाश्ता जैसे सूक्ष्म उद्यम, पशुपालन इत्यादि स्वरोजगार का साधन विकसित कर रही हैं. अपनी रुचि अनुसार महिलाएँ स्वरोजगार के साधन विकसित कर रही हैं. जीविका की डीपीएम अनुराधा चंद्रा ने बताया कि किशनगंज जिला में इस योजना के तहत लगभग तीन लाख चार हजार से अधिक लाभार्थियों के बैंक खाते में राशि भेजी गई है. किशनगंज की जीविका दीदियों ने इस योजना की राशि से पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम इत्यादि कार्य शुरू किए हैं.

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कहा कि इस योजना की लाभार्थी दीदियों को उद्यम शुरू करने पर आकलन उपरांत आगे और किश्तों में दो लाख रुपये तक दिय जाएंगे. जिससे वे अपने स्वरोजगार को आगे बढ़ा सकेंगी. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लाभार्थियों को पूँजी का उपयोग कर, उद्यमिता से आर्थिक स्वावलंबन की राह अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. मिली राशि का स्वरोजगार के साधन विकसित करने के लिए उपयोग हो सके, इसके लिए जीविका सामुदायिक संगठन में लाभर्थियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लाभर्थियों का स्वरोजगार और अपना आय का साधन होने से, महिलाओं को सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद मिल रही है. आर्थिक स्वावलंबन से महिलाएँ सशक्त हो रही हैं.
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से प्राप्त राशि से बहादुरगंज प्रखंड के गांगी पंचायत की कुलसुम बेगम ने चूड़ी बेचने का व्यवसाय शुरू किया है. वे कहती हैं कि चूड़ी बिक्री के काम से उन्हें नियमित आमदनी होने लगी है. घर में दो पैसे आने लगे हैं. पति के देहांत के बाद घर में कमाने वाला कोई नहीं था. इस योजना ने हमें जीने का सहारा दिया है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ लेकर वे खुश हैं. उन्हें अपना स्वरोजगार शुरू करने के लिए पूँजी प्राप्त हुआ है.
वहीं, इस योजना का लाभ लेकर किशनगंज सदर प्रखंड के बेलवा पंचायत की लाडली बेगम ने चाट, चाउमीन की दुकान शुरू किया है. बताती हैं कि दुकान से रोजाना दो से तीन हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती है. पहले घर में ही रहते थे. पूँजी मिला तो व्यवसाय शुरू किया है. नियमित आमदनी हो रही है. ऐसे ही अन्य महिलाएँ भी इस योजना का लाभ लेकर स्वरोजगार का साधन विकसित कर रही हैं.
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिली दस हजार की राशि से टेढ़ागाछ प्रखंड की रहने वाली गीता दीदी, सब्जी की दुकान शुरू किया है. वे बताती हैं कि सब्जी दुकान से उन्हें महीने में 8 से 10 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. कब से सोच रहे थे, सब्जी की दुकान शुरू करने की. लेकिन पैसे नहीं थे. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की जानकारी मिलते ही, सूरज जीविका महिला ग्राम संगठन में निःशुल्क आवेदन किया. बैंक खाते में दस हजार रुपया प्राप्त हुआ. वे कहती हैं कि पैसे का मैसेज जब मोबाइल पर आया तो मैं बहुत खुश हुई. अगले ही दिन से सब्जी दुकान खोने के लिए प्रयास शुरू कर दिया.
कोचाधामन प्रखंड की वीणा दीदी ने इस योजना का लाभ लेकर पशुपालन कार्य शुरू किया है. वीणा देवी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिली 10 हजार रुपये की राशि से गाय खरीदी है. निर्धन परिवार से आने वाली वीणा देवी प्रसन्न नज़र आती है. उन्हें मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई है. दीदी बताती हैं कि वे पशुपालन कार्य को आगे बढ़ाना चाहती हैं. ताकि इसे आय का जरिया बनाया जा सके.
इस योजना का लाभ लेकर पोठिया प्रखंड की सुष्मिता जीविका दीदी, घर के पास ही जेरोक्स की दुकान चलाती है. दुकान से उन्हें महीने में पंद्रह हजार रुपये से अधिक की आमदनी हो जाती है. वे बताती हैं कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ उन्हें मिला है. इस योजना से मिले दस हजार रुपये से इन्होंने जेरोक्स मशीन खरीदी. दीदी बताती हैं कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत उन्हें और राशि मिलने पर वे दुकान में निवेश करेंगी.
दिघलबैंक सिंघीमारी की अनीता देवी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की राशि से नाश्ता की दुकान शुरू की है. दीदी बताती हैं कि पति के देहांत के बाद घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी. आय का कोई साधन नहीं था. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से अपना रोजगार हो गया है. दुकान से प्रतिदिन कमाई होती है. आमदनी होने से बच्चों की परवरिश में सहूलियत हो रही है.
ठाकुरगंज प्रखंड के रसिया की वीणा देवी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिली दस हजार की राशि से सिलाई मशीन खरीदी है. कपड़ा सिलाई से उन्हें आमदनी हो जाती है. वे बताती हैं कि उन्हें कपड़ा सिलाई का हुनर था. सिलाई मशीन नहीं थी. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने मेरे हुनर को आमदनी का जरिया बनने का मौका दिया है।























