- घटना के बाद कई शिक्षकों और पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि संविदा पर कार्यरत एक इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी गई है…
दुर्केश सिंह,संपादकीय प्रभारी नजरिया, 27जुलाई।
राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से सात बच्चों की मौत और कई के घायल होने के बाद इस हादसे ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अभिभावकों ने क्या सीखा!47 वर्ष की पत्रकारिता में ऐसा हादसा सुनने में नहीं आया है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में कादीपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत पोखरदहा में एक सरकारी स्कूल की नवनिर्मित चारदीवारी गिर जाने से एक होनहार बच्चों की उसके नीचे दबने से चार वर्ष पहले मौत हो गई थी। यह घटना उस समय क्षेत्रवासियों को हिलाकर रख दी थी है। जिस कमजोर चारदीवारी के कारण उक्त हादसा हुआ था, वैसे कारण कादीपुर और करौंदीकला ब्लॉक क्षेत्र के तमाम स्कूलों में अब भी मौजूद हैं।
फिलहाल राजस्थान की घटना के बाद यह आरोप सामने आया है कि मृत बच्चों के अंतिम संस्कार में साइकिल और मोटरसाइकिल के टायर जलाए गए।
इससे पहले घायल बच्चों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया था कि छत से टुकड़े गिरने की शिकायत के बावजूद शिक्षकों ने ध्यान नहीं दिया था।
झालावाड़ कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने मीडिया से बातचीत में अंतिम संस्कार में टायरों के इस्तेमाल की बात से इनकार किया। वहीं, स्कूल की इमारत गिरने की घटना पर उन्होंने कहा कि जांच जारी है और लापरवाही सामने आने पर ज़िम्मेदारों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी।
घटना के बाद कई शिक्षकों और पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि संविदा पर कार्यरत एक इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी गई है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान के झालावाड़ ज़िला मुख्यालय से क़रीब 90 किलोमीटर दूर मनोहर थाना इलाके के पिपलोदी गांव में शुक्रवार सुबह एक सरकारी स्कूल के दो कमरे अचानक गिर गए थे। इस हादसे में मौके पर ही तीन बच्चों की मौत हो गई और चार बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। शनिवार सुबह दुर्घटना में मारे गए सातों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया।
इस बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि अंतिम संस्कार के दौरान साइकिल और मोटरसाइकिल के टायरों का इस्तेमाल किया गया।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “क्या है गरीब होने की सज़ा, स्कूल पढ़ने जाओ और छत ढहने पर मर जाओ? मर जाने के बाद चिता लकड़ी से नहीं रबड़ के टायर से जलाओ? कई बार – कुछ कहने का मन नहीं करता है।बस मन खट्टा हो जाता है।”
अंतिम संस्कार में टायरों के इस्तेमाल के सवाल पर झालावाड़ कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने मीडिया से कहा, “ऐसा कुछ नहीं हुआ है। हमने लकड़ियों समेत अन्य सभी सामग्री उपलब्ध करवाई थी।वहां तीन श्मशान थे। एक जगह चार शवों का अंतिम संस्कार हुआ, उस जगह मैं खुद मौजूद था।एक जगह दो और एक अन्य जगह एक शव का अंतिम संस्कार किया गया। सभी जगह प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।
उन्होंने आगे कहा, “इस इलाके़ में लोग बारिश के समय चिता के साइड में टायर रखते हैं, क्योंकि बारिश में लकड़ियां गीली हो जाती हैं। लेकिन मैंने खुद उन्हें समझाते हुए सभी टायर हटवा दिए थे”
हालांकि अंतिम संस्कार के दौरान टायरों के इस्तेमाल से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। इस सवाल पर सरपंच प्रतिनिधि ने दावा किया, “वहां बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे, किसी ने साइकिल के एक-दो टायर डाल दिए थे, जिन्हें बाद में हटा दिया गया था।”
बता दें कि स्कूल हादसे में घायल ग्यारह बच्चे अभी भी ज़िला मुख्यालय के एसआरजी अस्पताल में भर्ती हैं। मृतकों और घायलों में ज़्यादातर बच्चे भील आदिवासी और दलित परिवारों से हैं।
झालावाड़ के एडिशनल कलेक्टर अभिषेक चारण ने मिडिया को फ़ोन पर बताया कि शुक्रवार देर शाम तक पोस्टमार्टम होने के कारण शनिवार सुबह सातों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया।
झालावाड़ कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के असली कारणों का पता चलेगा।






















