दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज 11जुलाई।
बुधवार को बिहार बंद की अगुआई करने महागठबंधन दलों के सभी नेता एकजुट दिखे। लगभग सभी मतदाताओं के पास उपलब्ध आधार कार्ड, वोटर कार्ड और मनरेगा जाब कार्ड जैसे प्रमाणपत्रों को वोटर लिस्ट सत्यापन के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रमाण पत्र नहीं मानने के विरोध में महागठबंधन ने बिहार में चक्का जाम का आह्वान किया था जो लोकनायक जयप्रकाश के नेतृत्व में इमरजेंसी के विरोध में आहूत आंदोलन की याद दिला गया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी सहित सभी महागठबंधन नेताओं की बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है।इस सफलता में क्या चूक हुई, महागठबंधन विरोधी दल के कुछ नेता उस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे है।
मीडिया ट्रायल में क्या सवाल उठाया जा रहा है
राहुल गांधी बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ एक खुली गाड़ी में सवार होकर पटना की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन करने उतरे थे। इस गाड़ी पर बिहार में कांग्रेस विधायक दल के नेता शक़ील अहमद ख़ान, बिहार कांग्रेस यूनिट के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह और मदन मोहन झा भी थे।कन्हैया कुमार भी इस गाड़ी पर सवार होना चाहते थे लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया।
कौन हैं कन्हैया कुमार
कन्हैया कुमार परमानेन्ट सीडब्ल्यूसी इन्वाइटी मेंबर हैं और कांग्रेस के स्टूडेंट्स विंग एनएसयूआई के प्रभारी हैं। कन्हैया को राहुल की गाड़ी पर नहीं चढ़ने देने का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है।
बिहार में अपनी राजनीतिक पार्टी जन सुराज पार्टी को स्थापित करने के अभियान में लगातार जुटे जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को यह नागवार लगा। उन्होंने निशाने पर राहुल को लिया है।
प्रशांत किशोर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि कांग्रेस ने आरजेडी के दबाव में कन्हैया को राहुल के साथ नहीं आने दिया।
प्रशांत किशोर ने कहा, ”बिहार में कांग्रेस के जितने भी नेता हैं, उनमें कन्हैया कुमार सबसे प्रतिभाशाली नेताओं में से एक हैं।अगर बिहार में कांग्रेस कन्हैया का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है तो जो बात हमलोग पहले से ही कहते आ रहे हैं कि कांग्रेस आरजेडी की पिछलग्गू पार्टी है, वो पूरी तरह से सच है।आरजेडी का नेतृत्व कन्हैया कुमार जैसे क़ाबिल नेताओं से डरता है। आरजेडी नेतृत्व ने ही कन्हैया को दूर रखने के लिए कहा होगा।
किशनगंज जिले कांग्रेसियौं ने कहा कि कन्हैया कुमार और अन्य कांग्रेसी नेता इस मामले में एंटी महागठबंधन मीडिया को राजनीति करने से नहीं रोक सकता।
कांग्रेस विधायक दल के नेता शक़ील अहमद ख़ान जेएनयूएसयू के अध्यक्ष रहे हैं शक़ील अहमद ख़ान से भी मीडिया ने उक्त सवाव किया है।
शक़ील अहमद ख़ान कहते हैं, ”क्या कन्हैया उस लिस्ट में शामिल थे, जिन्हें राहुलजी के साथ गाड़ी पर सवार होना था? अगर वह उस लिस्ट में शामिल नहीं थे तो उन्हें नहीं आना चाहिए था।हम पहले से ही सहमति से नाम तय करते हैं और जिन्हें शामिल होना होता है, उन्हें बता दिया जाता है। इस पर कोई विवाद ही नहीं होना चाहिए था।’
शक़ील अहमद ख़ान ने तथा कथित मीडिया को यह भी जवाब दिया: ”कौन क्या कह रहा है, इसका कोई मतलब नहीं है। जिनको शामिल होना था, उन्हें बता दिया गया था। बिहार में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है, उसे किसी से कोई परेशानी क्यों होगी। कांग्रेस अपना फ़ैसला ख़ुद करती है। शकील अहमद से जब एक और सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा:
”पप्पू यादव हमारे अलायंस पार्टनर नहीं हैं।ज़ाहिर है कि वह कांग्रेस में भी नहीं हैं।पप्पू यादव भी राहुल के साथ गाड़ी में सवार होना चाहते थे लेकिन उन्हें किस आधार पर हम लोग आमंत्रित करते? पप्पू न कांग्रेस में हैं और न ही गठबंधन के सहयोगी हैं”। फिलहाल किशनगंज के कांग्रेसी सांसद डॉ.जावेद आलम के कार्यालय में बताया गया कि कांग्रेस और राजद सहित महागठबंधन के तमाम दिग्गज नेताओं नौ जुलाई को बिहार में वोटबंदी के खिलाफ चक्का जाम की सफलता के लिए मतदाताओं की स्वत:स्फूर्ति के प्रति आभार जता कर रहे हैं।






















