- कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के नदी में आई उछाल चार पंचायतों टापू पर तब्दील।

•तटबंध से पूरब बसे सभी चार पंचायत पूरी तरह बाढ़ से प्रभावित हो गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 26 नाव चलाए जा रहे हैं। साथ ही सुरक्षा को लेकर एनडीआरएफ की एक यूनिट 30 सदस्यीय टीम पहुंच चुकी है टीम बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक रहेगा : अंचला अधिकारी कुशेश्वरस्थान पूर्वी।
हजारों एकड़ में लगी धान की फसल बाढ़ के पानी में समाया।

कुशेश्वरस्थान पूर्वी:
कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड से होकर गुजरने वाले कोसी और कमला बलान नदी में आई उछाल से कमला बलान नदी के पश्चिमी तटबंध से पूरब बसे चार पंचायतों के सभी गांव टापू में तब्दील हो गया है। हजारों एकड़ में लगी धान की फसल बाढ़ के पानी में डुब गया है। चारों पंचायत के सभी गांव एवं सुघराईन पंचायत के भरैन मुशहरी तथा भिण्डुआ पंचायत के गोबराही गांव के किनारे बसे सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है।
नदी के जलस्तर में वृद्धि के रफ्तार का आलम यह है कि बीती रविवार की शाम 6 बजे से सोमवार की दोपहर बाद चार बजे तक 22 घंटा में नदी का जलस्तर साढ़े चार से पांच फीट खड़ा पानी बढ़ी। जिससे चारों पंचायत के 41 गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इटहर पंचायत के चौकीय,लक्षमीनिया, इटहर, इटहर पोखर,जिमराहा बिसुनिया,समौरा, उसरी पंचायत के उसरी,हरिनाही,कोला, छोटकी और बड़की कोनिया,अरराही,उजुआ सिमरटोका पंचायत के उजुआ, झाझा, कोला,कोदरा ,कुंज भवन, महादेव मठ, बुढ़िया सुकराती,, तिलकेश्वर पंचायत के बघमोत्तर, बहवा, सपही,बथौल, गोलमा ,सेवका,करैन,तिलकपुर सभी 41 से अधिक गांव में किनारे बसे लोगों के घरों में पानी घुस गया है।
बाढ़ प्रभावित गांवों में सैकड़ों परिवार के लोग अपने अपने घरों में चौकी और खाटिया पर बैठ कर विगत 22 घंटा से समय व्यतीत कर रहे हैं। सैकड़ों परिवार के घरों में पानी रहने की वजह से चूल्हा नहीं जला है। प्रभावित परिवार गांव के अपने शुभचिंतकों के ऐसे परिवार जिनके घर में पानी नहीं गया है उनके घर खाना बनाकर भोजन किए या फिर चुरा चीनी और सतू खाकर बाढ़ के पहले दिन अपनी समय व्यतीत किया। बघमोत्तर के कारी सदा,राम पुकार सदा,राम रतन सदा, प्रसादी सदा, बहाव के सुमन सदा,लखन सदा,आनंदी सदा बथैला के गणेश सदा राजा राम सदा छोटे लाल सदा ने बताया कि अचानक रात लगभग दो बजे घर में पानी घुस गया। आनन-फानन में घर के सामान को चौकी और खटिया पर रखकर बचाया। सुबह गांव में ही ऊंचे स्थानों पर सभी सामान लेकर गया। लोगों ने बताया कि दिन में चुरा चीनी और सतू खाकर रहे। रात में भी यही खाना पड़ेगा। कमो बेस सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में पीड़ित परिवारों के साथ यही स्थिति है।
मुख्य सड़क कुशेश्वरस्थान फुलतोड़ा के किनारे बसे गांवों को छोड़कर बाढ़ प्रभावित सभी गांव का सड़क सम्पर्क भंग हो गया है। लोग नाव के सहारे मुख्य मार्ग पर आते हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के 4815.69 हेक्टेयर में लगी खरीफ की फसल बाढ़ के पानी में डुब गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में सुबह 9 बजे से बिजली गुम है। जिससे पीड़ित लोगों की रात अंधेरे में कटेगी। चारों पंचायत के सभी विद्यालयों में या तो पानी घुस गया है या फिर चारों ओर पानी से घिर गया है। बीईओ राम भरोसे चौधरी ने बताया कि वरीय पदाधिकारी को चार पंचायतों के बाढ़ प्रभावित विद्यालय को बंद करने के लिए पत्र लिखा गया है।
सीऔ गोपाल पासवान ने बताया कि तटबंध से पूरब बसे सभी चार पंचायत पूरी तरह बाढ़ से प्रभावित हो गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे हैं। 26 नाव. उन्होंने बताया कि सुरक्षा को लेकर एनडीआरएफ की एक यूनिट 30 सदस्यीय टीम पहुंची है। टीम बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक रहेगा। उन्होंने बताया कि तेगच्छा, महादेव मठ, तिलकेश्वर,सपही बुढ़िया सुकराती, बघमोत्तर, कोला टोका उजुआ,अरराही ,चौकीया, इटहर और लक्षमीनिया में सामुदायिक किचन शुरू किया गया है।























