दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी, नजरिया न्यूज, 28जनवरी।
समाज के विषय में जो सोचेगा वह कर्पुरी ठाकुर से बड़ा रत्न पाएगा। नीतीश कुमार और
तेजस्वी यादव इसी लाइन पर काम रहे थे। दोनों के काम से भारत की सियासत में हड़कंप मचा हुआ था। राहुल गांधी की ईमानदारी सोने में सुहागा का काम कर रही थी।
इसीलिए नीतीश कुमार की जरूरत भाजपा को पड़ गई। भाजपा रणनीतिकार नीतीश कुमार को अपने पाले में मिलाने का अभियान चलाए और सफलता प्राप्त की। लेकिन नीतीश कुमार अपनी आत्मा तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के पास छोड़ ही गए हैं। शरीर से भाजपा खेमे में रहेंगे।
भारतीय संस्कृति में आत्मारहित शरीर की अंत्येष्टि कर दी जाती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आत्मा तेजस्वी यादव के साथ रहेगी और शरीर भाजपा के साथ। आत्मा अजर अमर और अविनाशी है। शरीर का अंत किसी भी समय हो सकता है।
नीतीश कुमार की अजर अमर आत्मा तेजस्वी यादव के पास ही रहेगी । यह निष्कर्ष सोशल मीडिया के तमाम पत्रकारों की टिप्पणी के भावार्थ पर आधारित है।
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