=पोलिटिकल एनालिस्ट दीपक शर्मा: पर्दे पर जो दिखाया जा रहा है, पर्दे के पीछे बिल्कुल अलग हे…
पियूष रंजन सिंह, विशेष संवाददाता, नजरिया न्यूज, 28जनवरी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर जब पटना से दिल्ली तक अटकलों का बाज़ार गर्म था, तब उनकी बक्सर के एक मंदिर में पूजा करने की तस्वीरें सामने आईं।बिहार में अटकलें तेज़ हैं कि मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) प्रमुख नीतीश कुमार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के साथ महागठबंधन को छोड़कर एक बार फिर एनडीए में जा सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में तो नीतीश कुमार के भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने तक की ख़बरें चल रही हैं।
हालांकि बिहार जेडीयू प्रमुख उमेश सिंह कुशवाहा ने इन ख़बरों को केवल कयास बताया और कहा उनकी पार्टी ‘अभी भी महागठबंधन का हिस्सा’ है और इसमें कोई ‘भ्रम’ नहीं है।
उन्होंने कहा, “हमें कोई जानकारी नहीं है. हम तो इतना ही जानते हैं कि हमारे नेता काम कर रहे हैं और वो उसमें व्यस्त हैं।
केंद्रीय मंत्री और बक्सर के सांसद अश्विनी चौबे उनके साथ नज़र आए। नीतीश कुमार ने ख़ुद कुछ नहीं कहा लेकिन कई लोगों को तस्वीरें बहुत कुछ बोलती नज़र आईँ।
अश्विनी चौबे उसी भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं जिसके साथ मिलकर नीतीश कुमार की पार्टी ने 2019 का लोकसभा और 2020 का विधानसभा चुनाव लड़ा था।
फिलहाल नीतीश कुमार लालू प्रयास यादव के राष्ट्रीय जनता दल के समर्थन से मुख्यमंत्री हैं। साल 2022 के अगस्त महीने में नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले एनडीए से नाता तोड़ा था और सरकार बनाई थी।
उमेश कुशवाहा ने कहा:हमारे नेता विपक्षी एकता के सूत्रधार हैं. उन्होंने सभी विपक्षी दलों को एक जगह लाने का काम किया, तभी इंडिया गठबंधन ने अपना आकार लिया… जो हमारे नेता चाह रहे थे कि जल्द से जल्द सीटों का बंटवारा हो, तो उस पर कांग्रेस को सोचना चाहिए, उनको आत्ममंथन करना चाहिए।
वहीं कांग्रेस विधायक इजहारूल हुसैन और राजद विधायक अंजार नामी ने बताया:कुछ नहीं पता है। अभी एक ही लक्ष्य है कि लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं।
ग़ौरतलब है कि इससे पहले नीतीश कुमार कह चुके हैं कि वो एनडीए में वापस नहीं जाएंगे और भाजपा भी ये कह चुकी है कि नीतीश कुमार का एनडीए में स्वागत नहीं है।
इसी सप्ताह नीतीश कुमार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए बिना किसी का नाम लिए कहा कि कर्पूरी ठाकुर अपने परिवार का पक्ष नहीं लेते थे लेकिन आज लोग परिवार को आगे बढ़ाने में लगे हैं। इसके बाद ये कयास लगाए जाने लगे कि वो महागठबंधन से बाहर जा सकते हैं।
नीतीश कुमार साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले साल 2013 में एनडीए से अलग हुए थे। बाद में उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन बनाया।
2017 में वो महागठबंधन से अलग होकर फिर से एनडीए में शामिल हुए।बाद में वो एनडीए से नाता तोड़कर फिर महागठबंधन में आए।अब एक बार फिर एनडीए में उनकी वापसी के कयास लग रहे हैं।
इतनी बार पाला बदलने के कारण मीडिया के कई हलकों में उन्हें ‘पाला बदलने वाले’ तक की उपाधि दी गई है।
पोलिटिकल एनालिस्ट दीपक शर्मा ने कहा :पर्दे पर जो दिखाया जा रहा है, पर्दे के पीछे बिल्कुल अलग हे… ।























