=पेड़ घटने से जलग्रहण क्षेत्र खत्म हुआ तो नदियां ही खत्म हो जाएंगी…
=जलवायु परिवर्तन पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्यशाला का किया आयोजन
दुर्केश सिंह/वीरेंद्र चौहान, नजरिया न्यूज किशनगंज 27 मई |
जलवायु परिवर्तन राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और मानव स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार की निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य के अंतर्गत एक दिवसीय अंतर्विभागीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन सदर अस्पताल स्थित एएनएम् स्कूल प्रांगण में आज किया गया ।
उन्मुखीकरण कार्यशाला के आरंभ में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जिले के संबंधित अधिकारियों से चर्चा करते हुए मानव स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के कारण पड़ने वाले प्रभावों के विषय में गंभीर चर्चा की गई।
जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में हो रही वृद्धि:
समुद्र तल का पानी बढ़ने (बर्फ के पिघलने) , पानी के अम्लीकरण होने से बीमारियां बढ़ रही हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के सीडीओ , डीएस ,डीआईओ, डीपिएम् , डीडीए सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी , बीएचएम् , बीसीएम एवं सहयोगी संस्था के पदाधिकारी मुख्य रूप से भाग लिए।|
जलवायु से संबंधित घटनाएं मानव स्वास्थ्य को दो तरह से प्रभावित करती हैं:
सिविल सर्जन डॉ. राजेश कुमार ने बताया की जलवायु से संबंधित घटनाएं मानव स्वास्थ्य को दो तरह से प्रभावित करती हैं। सीधे तौर पर बीमारी, चोट, मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि और जीवन की हानि (जैसे, बवंडर, तूफान या अन्य चरम मौसम की घटना) का कारण बनती हैं। अप्रत्यक्ष रूप से जनसंख्या के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाकर, देखभाल या सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच और आर्थिक प्रणालियों पर प्रभाव (जैसे, चरम मौसम की घटना के द्वितीयक परिणाम के रूप में) के माध्यम से जीवन की स्थितियों को बाधित करती हैं।
उन्होंने स्वास्थ्य से जुड़े साझीदारों से कहा:
प्राकृतिक आपदाएं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से खतरनाक पदार्थों के उत्सर्जन के शक्तिशाली तंत्र भी हो सकती हैं।निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा तथा आपातकालीन प्रबंधन साझेदारों को आपातकालीन तैयारियों और भविष्य के प्रतिक्रिया प्रयासों तथा स्वास्थ्य सेवा वितरण क्षमताओं पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव को शामिल करना चाहिए। जलवायु परिवर्तन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसे सभी देशों को बहुपक्षीय रूप से संबोधित करना चाहिए। यह निश्चित रूप से इस सदी की सबसे बड़ी अस्थिर शक्तियों में से एक है जो हमारी वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर करती है, और पहले से ही पृथ्वी पर जीवन को बदलना शुरू कर रही है। यदि हम अभी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो जलवायु परिवर्तन तेजी से उन भूमि और जल को बदल देगा जिन पर हम सभी जीवित रहने के लिए निर्भर हैंं।
हमारे बच्चों और नाती-नातिनों की दुनिया बहुत अलग हो जाएगी:
सीएस किशनगंज ने कहा:
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से जमीनी स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। आने वाली पीढ़ियों के लायक दुनिया को बनाना है।
सीडीओ डॉ. मंजर आलम ने कार्यशाला के दौरान अपने उद्बोधन में कहा:
जलवायु परिवर्तन एक ऐसा विषय है जिसे गम्भीरता से लेने की जरूरत है। सिर्फ ये सोचकर कि ये एक औपचारिकता है। बैठक करना और चिंता जाहिर करना है।इससे कोई बदलाव नहीं आएगा। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से जमीनीस्तर पर कार्य करने की भी आवश्यकता है। प्रत्येक सामाजिक संस्थान और विभाग द्वारा वृहद स्तर पर जन जागरूकता के साथ व्यवहार परिवर्तन की कराना ही होगा ।युवाओं को इस विषय पर आयोजित परिचर्चा में शामिल करना आवश्यक है। क्योंकि आने वाली पीढ़ी को ऊर्जा की बचत सहित व्यवहार में परिवर्तन के लिए तैयार करना ही होगा। उन्होंने पेड़ और नदी के संबंधों पर कहा :
पेड़ घटने से यदि जलग्रहण क्षेत्र खत्म हो गया तो नदियां ही खत्म हो जाएंगी। प्रकृति के विरुद्ध युद्ध और विकास का दुष्परिणाम ही जलवायु परिवर्तन है। उन्होंने कभी प्राकृतिक रूप से समृद्ध रहे विंध्य क्षेत्र की जैव-विविधता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है |























