संवाददाता:- राजीव कुमार
आज के समय मे गरीब बच्चों की स्थिति ठीक नहीं है बाल श्रम समाज की गंभीर बुराईयों में से एक है गरीब बच्चों का भविष्य अंधकारमय है,
बतातें चलें कि गत कुछ वर्षों से भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा इस सम्बंध में प्रसंशा योग्य कदम उठाए गए है बच्चों की शिक्षा एवं उनकी बेहतरी के लिए अनेक कार्यक्रम एवं नीतियां बनाई गई है, तथा इस दिशा में सार्थक प्रयास किए गए हैं,किंतु बाल श्रम की समस्या आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है, इसमें कोई शक नहीं है की बाल श्रम की समस्या का जल्दी से जल्दी सरकार को कोई हल निकालना चाहिए यह एक गंभीर सामाजिक,कुरीति है तथा इसे जड़ से खत्म होना आवश्यक है, बाल मजदूरी करवाना ऐसा मजदूरी चाहे माता-पिता या अभिभावकों की इच्छा से हो या जबरदस्ती हो सभी बाल मजदूरी के अंतर्गत हिं आते हैं, बचपन सभी बच्चो का जन्म सिद्ध अधिकार होता है,जो माता-पिता का प्यार और देख-रेख में सभी को मिलना चाहिए ये गैर कानूनी कृत्य बच्चों को बड़ो की तरह जीने पर मजबूर करता है इसके कारण बच्चों के जीवन मे कई सारी जरूरी चीजों की कमी हो जाती है,जैसे उचित शारीरिक वृद्वि दिमाग का अनुपयुक्त विकास शारीरिक और बौद्धिक विकास बाधित होता है, सरकार के इतनी कोशिशों के बाबजूद भी बाल मजदूरी खुले आम करवाया जा रहा है बताते चलें कि बाल मजदूरी को अपराध की श्रेणी में होने के बाबजूद भी ईटा भट्टा बथनाहा में बाल मजदूरी करवाते देखा गया है, बथनाहा दीपोल के कई ईटा भट्टा में दर्जनों से अधिक बच्चों से मजदूरी करवाया जा रहा था, जब उनसे पूछा गया तो उनके अभिभावकों ने पेट का हवाला देते हुए बच्चों से मजदूरी करवाने की बात कहीं,।






















