- जिस सरकार को हार का भय नहीं है, वह सरकार 2008 से सस्ता तेल खरीदकर 2026में दोगुने मूल्य पर बेंच रही है…
दुर्केश सिंह संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 25मई 2026।
कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार को हार का भय था, वह सरकार सबसे मंहगा तेल 2008 में खरीदकर 55 रुपये लीटर देश में बेंच रही थी। वहीं भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार को हार का भय नहीं है, इसलिए 2026 में 2008 से सस्ता तेल खरीदकर देश में दोगुने मूल्य पर बेंच रही है।
वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह राज और कपिलदेव सिंह ने इस सवाल पर कहा कि कांग्रेस सरकार में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन कार्यपालिका के सुप्रिमों, न्यायपालिका के सुप्रिमों तथा देश के नेता प्रतिपक्ष करते थे, इसलिए 2008में विश्व बाजार में आज से भी मंहगा होने के बावजूद आधे मूल्य पर देश में पेट्रोल बिक रहा था। नरेंद्र मोदी की सरकार में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन भारत सरकार के सुप्रिमो, भारत सरकार द्वारा नामित एक मंत्री तथा नेता प्रतिपक्ष कर रहे हैं।इसलिए वर्ष 2026में वर्ष 2008 से विश्व बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद 2008 में दोगुने मूल्य पर पेट्रोल बिक रहा है।
न्यूज लांचर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक पुराना बयान पोस्ट किया गया है जिसमें वे कह रहे हैं:
“मैं आशा करता हूं डीजल और पेट्रोल का दाम प्रधानमंत्री जो बढ़ाएं हैं, उसे कम करेंगे, मेरी बात को गंभीरता से लेंगे।
वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े टाइगर कहते हैं कि 2008 में विश्व में क्रूड आयल सबसे मंहगा 147 डालर प्रति बैरल था। 2008 के अप्रैल में पेट्रोल 45 और डीजल 31रुपये लीटर था।
आज 2026 में विश्व बाजार में क्रूड आयल 103 डालर प्रति बैरल है पेट्रोल और डीजल 100 के पार क्यों बिक रहा है?
आखिर दो गुना मंहगा पेट्रोल और डीजल क्यों है?
वरिष्ठ पत्रकार श्री टाइगर ने कहा कि मनमोहन सिंह अर्थशास्त्री थे। उनको मालूम था कि देश के ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति को बचाए रखने के लिए डीजल और पेट्रोल का मूल्य न्यूनतम बनाए रखना देश में आवश्यक है।
*एआई की रिपोर्ट के मुताबिक*
“2008 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) का मूल्य साल की शुरुआत में लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल था। जुलाई 2008 में यह अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) पर पहुंच गया और 147.50 डॉलर प्रति बैरल का रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद, साल के अंत तक वैश्विक मंदी के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई और यह गिरकर लगभग 30 से 40 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया।
2008 के अंत (दिसंबर 2008) में वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई और यह गिरकर 30-40 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया था।
भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल (Indian Basket) की औसत कीमत 95 से 100 डालर प्रति बैरल रहा। पत्रकार अशोक वानखेड़े ने बताया कि आज 25 मई 2026 को विश्व बाजार में क्रूड ऑयल लगभग 103 डालर प्रति बैरल मूल्य है।






















