नजरिया न्यूज। भरगामा।
भरगामा स्थित रेणु साहित्य परिसर में प्रख्यात कथा शिल्पी एवं स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी फणीश्वर नाथ रेणु को 104 वीं जयंती पर ग्रामीण परिवेश के लोगों ने उन्हें शिद्दत से याद करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया। अध्यक्षता अजय अकेला ने की। समारोह का आगाज रेणु के तैल चित्र पर सामूहिक रूप से पुष्पांजलि अर्पित करने के पश्चात किया गया। मौके पर पूर्व जिला पार्षद सत्यनारायण यादव ने रेणु के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रेणु जी ने अपनी कालजयी रचनाओं से न सिर्फ अपने देश में ,बल्कि विदेशों में भी भारत का नाम रोशन किया। समाजसेवी चंद्रानंद झा चाणक्य ने रेणु को प्रेमचंद की परंपरा की अंतिम कड़ी बताया तो वहीं गयानंद सिंह ने उन्हें ग्रामीण जनजीवन को उजागर करने वाला महान कथा शिल्पी बताया।जेपी आंदोलन के सेनानी नागेश्वर कमल ने कहा- रेणु जी ने अपनी रचनाओं में ग्रामीण जन-जीवन की गहराइयों को बड़ी बारीकी से प्रस्तुत किया।
रेणु साहित्य मंच के अजय अकेला ने कहा- रेणु क्रांतिधर्मा लेखक थे ।उन्होंने अपने देश को आजाद कराने के पश्चात 1950 में पड़ोसी देश नेपाल में प्रजातंत्र की स्थापना में काफी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था।समारोह में पूर्व सरपंच भुवनेश्वर यादव, बासुदेव ठाकुर, राजेंद्र मंडल, संत योगानंद दास, सदानंद दास,पृथ्वी मंडल, शशिकांत मिश्र, महेंद्र मंडल, विद्यानंद यादव, ललन पासवान, राजेंद्र यादव, भवेश ठाकुर ,सुमन ठाकुर, के अलावे सदानंद मेहता मनीष यादव एवं रेणु कोचिंग के छात्र- छात्राओं ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।






















