दशहरे के पावन पर्व खत्म होते ही शराब का कहर, सड़कों पर शराब के नशे में झूमते शराबी, सडकों में कलह
नजरिया न्यूज़ ओम प्रकाश अग्रवाल
बिरसिंहपुर/पाली दशहरा के पावन पर्व के बाद बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र में शराबखोरी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गली-गली में अवैध रूप से शराब की आपूर्ति जारी रही, क्योंकि लाइसेंसी शराब ठेकेदारो ने पहले ही पैकारी के माध्यम से गली-गली और अपने छोटे दुकानदार जैसे घरों होटल पान की दुकानों ढाबों में शराब पहुंचा दी थी जिसके चलते क्षेत्र में नशेड़ियों का सड़कों पर शराब पीकर घूमना गिरना, आपसी मारपीट और घरेलू कलह की घटनाएं तेजी से बढ़ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब जिला आबकारी विभाग की मिली भगत है क्योंकि आबकारी विभाग इस पूरे मामले पर मौन साधे हुए है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, शराब ठेकेदारों द्वारा पैकारी के माध्यम से शराब को गांव गांव और कस्बे के हर मोहल्ले में चोरी-छिपे बेचा गया। परिणाम यह हुआ कि त्योहार की खुशी मातम में बदल गई। कई जगहों पर शराब के नशे में धुत लोग सड़क किनारे झूमते और गिरे हुए देखे गए। राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सबसे चिंताजनक स्थिति छात्र और युवा वर्ग को लेकर सामने आई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि नशे की हालत में युवकों के बीच गाली-गलौज और मारपीट की घटनाएं हुईं। कई घरों में शराब पीकर आने पर पति-पत्नी और परिवार के सदस्यों के बीच झगड़े हुए, जिससे त्योहार के बाद का माहौल तनावपूर्ण हो गया। महिलाओं ने इस अवैध बिक्री पर गहरा रोष व्यक्त किया है।
जब इस संबंध में जिला आबकारी विभाग के अधिकारियों से फोन पर बात करने का प्रयास किया गया, तो अधिकारियों का जवाब हैरान कर देने वाला है ।सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि “अगर शराब नहीं बिकेगी और हमारे द्वारा पैकारी पर रोक लगाई जाएगी तो शराब के लाइसेंसी ठेकेदार दुकान बंद करके चाबी हमारे टेबल में फेंक कर चले जाएंगे तो राजस्व कहां से आएगा।” यहां हमें ऊपर से दबाव है करोड़ों का राजस्व इकट्ठे करने का इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि विभाग राजस्व के लालच में अवैध पैकारी अवैध बिक्री पर आंखें मूंदे हुए है।
इस लिए बिरसिंहपुर पाली के शराब ठेकेदारों के एजेंटों द्वारा शराब पैकारी के माध्यम से पहले ही घर-घर गांव गांव ढाबों में शराब पहुंचा दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी अमले को इसकी पूरी जानकारी थी। कि गांव गांव में ढाबों में दुकानों में शराब पहुंचाई जाती है लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। कभी-कभार छोटे विक्रेताओं को पकड़कर बड़ी मछलियों को बचा लिया जाता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस अवैध कारोबार से न केवल कानून व्यवस्था बिगड़ रही है, बल्कि युवा पीढ़ी भी नशे की गिरफ्त में आती जा रही है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि बिरसिंहपुर पाली में अवैध शराब पैकारी बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए। दोषी ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं और लापरवाह आबकारी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।
फिलहाल, आबकारी विभाग की चुप्पी किस यह सब जाहिर होता है कि राजस्व के लिए आबकारी विभाग अपने ही संरक्षण पर पैकारी का कारोबार करवा रही। बिरसिंहपुर पाली में बढ़ती शराब खोरी के कारण आबकारी विभाग के ऊपर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे है। क्या राजस्व के लिए नियमों को ताक पर रख दिया जाएगा? क्या आम जनता की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी शराब से होने वाली कमाई है? इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन को देना होगा।
दशहरे के पावन पर्व खत्म होते ही शराब का कहर, सड़कों पर शराब के नशे में झूमते शराबी, सडकों में कलह
बिरसिंहपुर/पाली दशहरा के पावन पर्व के बाद बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र में शराबखोरी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गली-गली में अवैध रूप से शराब की आपूर्ति जारी रही, क्योंकि लाइसेंसी शराब ठेकेदारो ने पहले ही पैकारी के माध्यम से गली-गली और अपने छोटे दुकानदार जैसे घरों होटल पान की दुकानों ढाबों में शराब पहुंचा दी थी जिसके चलते क्षेत्र में नशेड़ियों का सड़कों पर शराब पीकर घूमना गिरना, आपसी मारपीट और घरेलू कलह की घटनाएं तेजी से बढ़ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब जिला आबकारी विभाग की मिली भगत है क्योंकि आबकारी विभाग इस पूरे मामले पर मौन साधे हुए है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, शराब ठेकेदारों द्वारा पैकारी के माध्यम से शराब को गांव गांव और कस्बे के हर मोहल्ले में चोरी-छिपे बेचा गया। परिणाम यह हुआ कि त्योहार की खुशी मातम में बदल गई। कई जगहों पर शराब के नशे में धुत लोग सड़क किनारे झूमते और गिरे हुए देखे गए। राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सबसे चिंताजनक स्थिति छात्र और युवा वर्ग को लेकर सामने आई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि नशे की हालत में युवकों के बीच गाली-गलौज और मारपीट की घटनाएं हुईं। कई घरों में शराब पीकर आने पर पति-पत्नी और परिवार के सदस्यों के बीच झगड़े हुए, जिससे त्योहार के बाद का माहौल तनावपूर्ण हो गया। महिलाओं ने इस अवैध बिक्री पर गहरा रोष व्यक्त किया है।
जब इस संबंध में जिला आबकारी विभाग के अधिकारियों से फोन पर बात करने का प्रयास किया गया, तो अधिकारियों का जवाब हैरान कर देने वाला है ।सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि “अगर शराब नहीं बिकेगी और हमारे द्वारा पैकारी पर रोक लगाई जाएगी तो शराब के लाइसेंसी ठेकेदार दुकान बंद करके चाबी हमारे टेबल में फेंक कर चले जाएंगे तो राजस्व कहां से आएगा।” यहां हमें ऊपर से दबाव है करोड़ों का राजस्व इकट्ठे करने का इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि विभाग राजस्व के लालच में अवैध पैकारी अवैध बिक्री पर आंखें मूंदे हुए है।
इस लिए बिरसिंहपुर पाली के शराब ठेकेदारों के एजेंटों द्वारा शराब पैकारी के माध्यम से पहले ही घर-घर गांव गांव ढाबों में शराब पहुंचा दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी अमले को इसकी पूरी जानकारी थी। कि गांव गांव में ढाबों में दुकानों में शराब पहुंचाई जाती है लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। कभी-कभार छोटे विक्रेताओं को पकड़कर बड़ी मछलियों को बचा लिया जाता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस अवैध कारोबार से न केवल कानून व्यवस्था बिगड़ रही है, बल्कि युवा पीढ़ी भी नशे की गिरफ्त में आती जा रही है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि बिरसिंहपुर पाली में अवैध शराब पैकारी बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए। दोषी ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं और लापरवाह आबकारी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।
फिलहाल, आबकारी विभाग की चुप्पी किस यह सब जाहिर होता है कि राजस्व के लिए आबकारी विभाग अपने ही संरक्षण पर पैकारी का कारोबार करवा रही। बिरसिंहपुर पाली में बढ़ती शराब खोरी के कारण आबकारी विभाग के ऊपर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे है। क्या राजस्व के लिए नियमों को ताक पर रख दिया जाएगा? क्या आम जनता की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी शराब से होने वाली कमाई है? इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन को देना होगा।













