किशनगंज, बिहार: उच्च रक्तचाप, मधुमेह, तीन प्रमुख प्रकार के सामान्य कैंसर—मुंह, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, हृदय रोग, एनएएफएलडी और सीओपीडी की समय पर पहचान कर जोखिम कारकों को कम करना तथा आवश्यक प्रबंधन उपलब्ध कराने की घोषणा…
किशनगंज, बिहार -जिला प्रशासन ने किया रक्षाबंधन पर्व अद्वितीय अभियान चलाने की घोषणा
1 सितंबर से 30 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान- गैर संचारी रोगों की होगी पहचान, जांच और उपचार
वीरेंद्र चौहान नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज 28 अगस्त 2026 ।
बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ते तनाव के कारण गैर-संचारी रोग आज बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और सीओपीडी जैसी बीमारियां कई बार शुरुआती दौर में बिना स्पष्ट लक्षण के शरीर में बढ़ती रहती हैं। ऐसे में समय पर जांच नहीं होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और उपचार में देरी का खतरा बढ़ जाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार अब बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय उसे शुरुआती अवस्था में ही पहचानने और उपचार से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।इसी उद्देश्य से जिलों में जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार अभियान 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम सामुदायिक स्तर तक पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग करेगी। जरूरत के अनुसार जांच, चिकित्सकीय परामर्श, उपचार, दवा और आगे की स्वास्थ्य सेवाओं से मरीजों को जोड़ा जाएगा।
सरकार की मंशा—बीमारी की पहचान घर के करीब, उपचार समय पर
एनसीडीओ डॉ उर्मिला कुमारी ने बताया कि सरकार की मंशा है कि गैर-संचारी रोगों की जांच केवल अस्पताल आने वाले मरीजों तक सीमित न रहे, बल्कि जो लोग स्वस्थ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बीमारी के जोखिम में हैं, उनकी भी समय रहते पहचान की जाए। इसके लिए घर-घर भ्रमण के माध्यम से उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा।अभियान का मुख्य उद्देश्य उच्च रक्तचाप, मधुमेह, तीन प्रमुख प्रकार के सामान्य कैंसर—मुंह, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, हृदय रोग, एनएएफएलडी और सीओपीडी की समय पर पहचान कर जोखिम कारकों को कम करना तथा आवश्यक प्रबंधन उपलब्ध कराना है। इससे बीमारी के कारण होने वाली असामयिक मौतों को कम करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग पर विशेष जोर
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता एएनएम के सहयोग से घर-घर भ्रमण करेंगी। परिवार फोल्डर और सामुदायिक आधारित आकलन प्रपत्र के माध्यम से लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी तथा विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान की जाएगी। 30 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लोगों की एनसीडी स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान रहेगा।स्वास्थ्य संस्थानों पर जरूरत के अनुसार सीबीसी, ब्लड शुगर, एचबीए1सी, लिपिड प्रोफाइल, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, 24 घंटे का यूरिन टेस्ट, ईसीजी, पैप स्मीयर, बायोप्सी, विटामिन-डी3, विटामिन-बी12 तथा टी-3, टी-4 और टीएसएच जैसी जांच सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
समय पर जांच से गंभीर बीमारी का खतरा होगा कम
जिलापदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि गैर-संचारी रोगों के खिलाफ सबसे प्रभावी उपाय है कि बीमारी की पहचान शुरुआती अवस्था में ही कर ली जाए। उन्होंने कहा कि कई लोग बीमारी के लक्षण स्पष्ट होने के बाद ही अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि नियमित स्वास्थ्य जांच से कई गंभीर बीमारियों और उनके जोखिम कारकों का पहले ही पता लगाया जा सकता है।उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों को अभियान को पूरी गंभीरता से संचालित करने तथा घर-घर स्क्रीनिंग से लेकर मरीजों के उपचार और फॉलोअप तक पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि स्वास्थ्यकर्मी उनके घर पहुंचकर जांच करें तो इसमें सहयोग करें और उम्र एवं स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आवश्यक जांच अवश्य कराएं।
सिर्फ पहचान नहीं, उपचार और फॉलोअप भी होगा
सिविल सर्जन ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल गैर-संचारी रोगों के मरीजों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन्हें आवश्यक उपचार और नियमित फॉलोअप से जोड़ना है। चिन्हित मरीजों की लाइन लिस्ट तैयार की जाएगी और उनकी स्थिति के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों पर जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों और जटिल लक्षण वाले मरीजों को आवश्यकता के अनुसार उच्चतर स्वास्थ्य संस्थानों पर रेफर किया जाएगा। टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से भी चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि मरीजों को समय पर विशेषज्ञ सलाह मिल सके।
हर स्तर पर होगी निगरानी और ऑनलाइन प्रविष्टि
जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उर्मिला कुमारी ने कहा कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आशा कार्यकर्ता से लेकर जिला स्तर तक सभी स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका निर्धारित की गई है। आशा द्वारा घर-घर जाकर स्क्रीनिंग एवं उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान की जाएगी। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं एएनएम एनसीडी एप पर उपलब्ध सूची के आधार पर 30 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लोगों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करेंगे।उन्होंने बताया कि चिन्हित मरीजों को आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों पर लाकर चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार दिया जाएगा। गंभीर मरीजों को उच्चतर संस्थानों से जोड़ा जाएगा तथा उपचार प्राप्त कर रहे मरीजों का नियमित फॉलोअप किया जाएगा। अभियान से संबंधित आंकड़ों की रियल टाइम प्रविष्टि भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जिला स्तर पर इसकी लगातार निगरानी हो सके।
घर की चौखट तक पहुंचेगी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था
इस अभियान की खासियत यही होगी कि लोगों को बीमारी की जांच कराने के लिए हमेशा अस्पताल तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग स्वयं समुदाय और घरों तक पहुंचेगा। इससे ऐसे लोगों की भी पहचान संभव होगी जो किसी बीमारी के लक्षण नहीं होने के कारण जांच नहीं कराते हैं।सरकार का प्रयास है कि ‘पहचान में देरी, उपचार में देरी और बीमारी के गंभीर होने’ की स्थिति को रोका जाए, लोगों को समय पर जांच एवं उपचार मिले और गैर-संचारी रोगों के कारण होने वाली असामयिक मौतों को कम किया जा सके। साथ ही जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उनके नजदीक ही मिल सके।






















