नजरिया न्यूज़,
जोकीहाट:अररिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ और अन्य आपदाओं के दौरान लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए बाढ़ आश्रय स्थल आज बदहाली का शिकार हैं। स्थानीय स्तर पर देखरेख की कमी, प्रशासनिक उदासीनता और नियमित रखरखाव के अभाव में ये भवन अपने मूल उद्देश्य से भटक चुके हैं। कई जगह इनकी स्थिति इतनी खराब हो गई है कि आपदा के समय इनका उपयोग करना भी मुश्किल हो गया है।जोकीहाट प्रखंड के तारण पंचायत अंतर्गत कामत गांव वार्ड संख्या-02 स्थित बाढ़ आश्रय स्थल इसका जीता-जागता उदाहरण है। वर्ष 2020 में निर्मित यह भवन आज जर्जर हो चुका है। वर्तमान में इसका उपयोग जलावन रखने के लिए किया जा रहा है। भवन के भीतर और आसपास फैली गंदगी के कारण यहां ठहरना तो दूर, खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है।ग्रामीणों का कहना है
कि यदि अचानक बाढ़ या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा आ जाए, तो यह बाढ़ आश्रय स्थल प्रभावित लोगों के लिए किसी भी प्रकार से उपयोगी साबित नहीं होगा।तारण पंचायत के पूर्व मुखिया मेराज आलम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने के उद्देश्य से वर्ष 2020 में इस भवन का निर्माण कराया गया था। लेकिन वर्षों से इसकी साफ-सफाई, मरम्मत और देखरेख नहीं होने के कारण इसकी स्थिति दयनीय हो गई है।इधर, लगातार हो रही बारिश के कारण स्थानीय नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और नदी किनारे बसे परिवारों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। ऐसे समय में बाढ़ आश्रय स्थल पूरी तरह तैयार रहना चाहिए, लेकिन इसकी बदहाल स्थिति प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से बाढ़ आश्रय स्थल की तत्काल साफ-सफाई, मरम्मत और नियमित रखरखाव सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि आपदा की स्थिति में इसका उपयोग प्रभावित लोगों के लिए किया जा सके।






















