संजय ठाकुर संवाददाता पलासी अररिया 
अररिया पलासी बाढ़ पूर्व तैयारी एवं आपदा के समय सुरक्षा उपायों को लेकर पलासी प्रखंड सभागार में आंगनवाड़ी कर्मियों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाल विकास परियोजना पदाधिकारी श्री सदानन्द सिंह के निर्देशानुसार 11 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में महिला पर्यवेक्षिकाओं एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं को आपदा से बचाव और राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई।कार्यक्रम का आयोजन यूनिसेफ, बिहार इंटर एजेंसी ग्रुप एवं जीपीएसभीएस के सहयोग तथा आपदा प्रबंधन, पूर्णिया के मार्गदर्शन में एकीकृत बाल विकास सेवाएं, पलासी प्रखंड द्वारा किया गया।उन्मुखीकरण कार्यक्रम में बाढ़ पूर्व तैयारी, त्वरित प्रत्युत्तर एवं रिकवरी, डूबने की घटनाओं से बचाव, सर्पदंश से सुरक्षा तथा वज्रपात से बचाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला सलाहकार कमल कामत ने कहा कि अररिया जिले का पलासी प्रखंड बाढ़ की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान घबराने के बजाय साहस, संयम एवं आपसी सहयोग के साथ कार्य करना चाहिए।उन्होंने बच्चों, दिव्यांगजनों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं जैसे नाजुक एवं
संवेदनशील समूहों पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समेकित बाल विकास परियोजना कर्मियों के साथ-साथ समुदाय के बीच भी व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि संभावित बाढ़ आपदा के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।कमल कामत ने बाढ़ पूर्व तैयारी, त्वरित प्रत्युत्तर एवं रिकवरी में महिला पर्यवेक्षिकाओं एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी आपदा में सबसे पहले सहायता एवं प्रतिक्रिया देने वाले स्थानीय समुदाय और स्थानीय सेवा प्रदाता ही होते हैं।उन्होंने आंगनवाड़ी कर्मियों को अपने पोषक क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित होने वाले संभावित आंगनवाड़ी केंद्रों की पहचान करने की सलाह दी। साथ ही बाढ़ के दौरान आंगनवाड़ी सेवाओं के संचालन के लिए वैकल्पिक एवं सुरक्षित स्थान चिन्हित करने तथा आवश्यक सामग्रियों को सुरक्षित रखने की पूर्व तैयारी करने पर बल दिया।उन्होंने पोषक क्षेत्र के कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने, मानसून अवधि में प्रसव संभावित गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में संस्थागत प्रसव के लिए पंजीकृत कराने तथा राहत शिविरों में स्तनपान कॉर्नर, प्रसव पूर्व जांच एवं प्रसव के बाद जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।कार्यक्रम में प्रखंड
समन्वयक प्रमोद कुमार ने बाढ़ के दौरान अपनाए जाने वाले जीवनरक्षक कौशल, डूबने से बचाव, सर्पदंश एवं वज्रपात से सुरक्षा के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मॉकड्रिल के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया।वहीं WASH समन्वयक रोहित कुमार ने सामान्य दिनों के साथ-साथ आपदा के समय सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता एवं शौचालय के सुरक्षित उपयोग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।कार्यक्रम में महिला पर्यवेक्षिकाओं, आंगनवाड़ी सेविकाओं एवं स्वयंसेवकों सहित कुल 65 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से आंगनवाड़ी कर्मियों को बाढ़ एवं अन्य आपदाओं के दौरान समुदाय की सुरक्षा और संवेदनशील लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया गया।














