- पूर्वी भारत की कृषि को मजबूत बनाने पर विशेषज्ञों ने दिया जोर
नजरिया न्यूज़ पटना।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में 23 जुलाई, 2026 को 22वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक शुरू हुई। बैठक का उद्देश्य संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों की समीक्षा करना तथा पूर्वी भारत, विशेषकर बिहार और झारखंड के किसानों के लिए उपयोगी अनुसंधान एवं नई कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए सुझाव प्राप्त करना है।
बैठक के अध्यक्ष एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि लघु और सीमांत किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने वाली तथा किसान-केंद्रित तकनीकों का विकास समय की आवश्यकता है। उन्होंने जल उपयोग दक्षता, पोषक तत्व उपयोग दक्षता, अम्लीय मृदा पर अनुसंधान तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. राकेश कुमार ने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य के अनुसंधान राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होने चाहिए। उन्होंने जलवायु-स्मार्ट गांवों के विकास, कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्रों का पुनुरुद्धार तथा लघु किसानों के लिए उपयोगी तकनीकों के विकास पर जोर दिया।
आरएसी के अन्य सदस्यों डॉ. सी. एल. आचार्य (पूर्व निदेशक, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल; डॉ. आजाद सिंह पंवार (पूर्व निदेशक, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम; डॉ. रंजीत कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद; डॉ. महेश गाथाला (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सिस्टम्स एग्रोनॉमिस्ट, सिमिट) तथा डॉ. के. के. बरुआ, पूर्व प्रभागाध्यक्ष, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियाम ने भी संस्थान के अनुसंधान एवं प्रसार कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों, प्रगतिशील अनुसंधान कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संस्थान केवल गुणवत्तापूर्ण कृषि अनुसंधान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न प्रसार एवं क्षमता निर्माण गतिविधियों के माध्यम से विकसित एवं प्रमाणित प्रौद्योगिकियों को प्रभावी ढंग से किसानों के खेतों तक पहुँचाने के लिए भी पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
बैठक से पहले अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्यों ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ धान की रोपाई की। इसके बाद उन्होंने संस्थान के अनुसंधान प्रक्षेत्रों का भ्रमण कर समेकित कृषि प्रणाली, प्राकृतिक खेती, धन-परती भूमि प्रबंधन, पोषण वाटिका, ओपन टॉप चैंबर सहित विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने आम और अमरूद के पौधे भी लगाए। सदस्यों के लिए संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों एवं उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम के दौरान चार प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। साथ ही, कृषि अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु सूक्ष्मजीवी इनोकुलेशन कल्चर के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जी-बायोम प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए |
तकनीकी सत्रों में संस्थान के विभिन्न प्रभागों तथा बक्सर एवं रामगढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुखों ने अनुसंधान उपलब्धियों, नई तकनीकों, कृषि प्रसार कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्य सचिव डॉ. पी. सी. चंद्रन ने किया।



















