वीरेंद्र चौहान नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज, 25 जून।
जीविका दीदियाँ किशनगंज में समुदाय आधारित पर्यटन की संभावना पर कार्य कर रही हैं. जिससे किशनगंज की कला, संस्कृति, खान-पान, त्यौहार, नृत्य, चायपत्ता बागान, चायपत्ती बनने की प्रक्रिया इत्यादि को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकेगी. यहाँ के उत्पादों को बाजार और पहचान मिलेगा. इससे जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ होगा. जीविका डीपीएम अनुराधा चंद्रा ने बताया कि महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लि. से जुड़ी जीविका दीदियाँ, किशनगंज में समुदाय आधारित पर्यटन की संभावना पर कार्य कर रही हैं. उत्तर-पर्व के राज्यों में जाने वाले बड़ी संख्या में पर्यटक, किशनगंज से गुजरते हैं. उन तक किशनगंज की कला-संस्कृति, खान-पान, उत्पाद तक पहुँच बढ़ाने से, इससे जुड़े स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिलेगा. उन्होंने बताया कि किशनगंज की जीविका दीदियाँ कुडूम श्री संस्था के सहयोग से समुदाय आधारित पर्यटन की संभावना को लेकर गहन अध्ययन और संकलन कार्य कर रही हैं. विभिन्न प्रखंड की जीविका महिला संकुल संघ की जीविका दीदियाँ इस अध्ययन-संकलन कार्य में मदद कर रही हैं. किशनगंज के पोठिया, ठाकुरगंज, सदर प्रखंड के चाय बागानों, चायपत्ती बनने की प्रक्रिया, बागान में कार्य करने वाले कर्मियों की जीवन-शैली, खास कर संथाल, उड़ाव जनजाति के खान-पान, त्यौहार, झूमर नृत्य, शेरशाहवादी समुदाय की खेता-कढ़ाई, डोकरा कला, अन्य प्रखंड में महाभारत काल के पौराणिक स्थल इत्यादि को पर्यटन मानचित्र पर उभारने के प्रयास किए जा रहे हैं. इस अध्ययन संकलन कार्य में अंकित कुमार युवा पेशेवर कृषि जीविका किशनगंज, कुडूम श्री संस्था से जुड़ी स्टेट प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर सावित्री, प्रोगेम कोर्डिनेटर आयुषी मदद कर रही हैं. किशनगंज जिला में पर्यटन को बढ़ावा मिले, इसके लिए महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लि. से जुड़ी 737 शेयरधारक जीविका दीदियाँ उत्साह से इस दिशा में कदम बढ़ा रही हैं. वह अपने किशनगंज जिला की पहचान और आर्थिक प्रगति के लिए सकारात्मक प्रयास कर रही हैं.






















