वीरेंद्र चौहान नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज 12 जून,2026।
एक मां के लिए अपने नवजात शिशु को पहली बार गोद में लेना दुनिया का सबसे सुखद एहसास होता है। लेकिन जब उसी पल यह पता चले कि बच्चा जन्मजात विकृति के साथ पैदा हुआ है, तो खुशी की जगह चिंता और भविष्य की अनिश्चितता घर कर लेती है। किशनगंज प्रखंड के कचरिया गांव की रहने वाली राखी देवी और उनके पति रोनित बसाक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। छह माह पहले जन्मी उनकी बेटी अनीशा कुमारी का जन्म क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट (कटे होंठ और कटे तालू) की समस्या के साथ हुआ था।रोनित बसाक टोटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय में घर का खर्च चलाना ही कठिन था, ऐसे में लाखों रुपये खर्च होने वाले इलाज की कल्पना करना भी उनके लिए असंभव था। हर दिन बेटी को दूध पीने में होने वाली परेशानी और उसके भविष्य की चिंता पूरे परिवार को अंदर ही अंदर तोड़ रही थी।
आरबीएसके की स्क्रीनिंग बनी जीवन बदलने का कारण
एक दिन किशनगंज प्रखंड के नोमी देवी का आंगन आंगनबाड़ी केंद्र पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंची। स्क्रीनिंग के दौरान अनीशा की स्थिति की पहचान की गई। टीम ने परिवार को बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी और भरोसा दिलाया कि बच्ची का निःशुल्क इलाज संभव है।इसके बाद सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर अनीशा को आईजीआईएमएस, पटना रेफर किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में 10 जून 2026 को उसका सफल ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची स्वस्थ है और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही है।
मां की ममता और संघर्ष के बीच मिली सबसे बड़ी खुशी
राखी देवी बताती हैं कि बेटी के जन्म के बाद से उन्होंने शायद ही कोई रात चैन की नींद सोई हो। हर बार दूध पिलाते समय बच्ची को होने वाली परेशानी देखकर उनका दिल भर आता था। वह अक्सर सोचती थीं कि आखिर उनकी बेटी का भविष्य कैसा होगा।ऑपरेशन के बाद जब उन्होंने पहली बार अनीशा को देखा तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। भावुक होकर उन्होंने कहा कि मेरी बेटी को तकलीफ में देखकर मैं हर दिन भगवान से प्रार्थना करती थी। हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि बड़े अस्पताल में इलाज करा सकें। आरबीएसके की टीम ने हमें सिर्फ अस्पताल तक नहीं पहुंचाया, बल्कि हर कदम पर हमारा हौसला भी बढ़ाया। आज मेरी बेटी का सफल ऑपरेशन हो गया है। अब मुझे विश्वास है कि वह भी बाकी बच्चों की तरह सामान्य जीवन जी सकेगी। मैं स्वास्थ्य विभाग, डॉक्टरों और पूरी आरबीएसके टीम का दिल से धन्यवाद करती हूं।”
गरीब पिता के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं
टोटो चालक रोनित बसाक कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी का इतना महंगा इलाज बिना आर्थिक बोझ के संभव हो पाएगा।उन्होंने कहा कि मेरी रोज की कमाई से घर का खर्च ही मुश्किल से चलता है। जब डॉक्टरों ने बताया कि आरबीएसके के माध्यम से मेरी बेटी का इलाज निःशुल्क होगा, तब पहली बार लगा कि भगवान ने हमारी सुन ली है। अगर यह योजना नहीं होती तो शायद मैं अपनी बेटी का इलाज कभी नहीं करा पाता। आज उसे स्वस्थ देखकर लगता है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने मेरी बच्ची को नया जीवन दिया है। इसके लिए मैं सभी का जीवनभर आभारी रहूंगा।
जिलाधिकारी ने आरबीएसके टीम की सराहना की
जिलाधिकारी विशाल राज ने अनीशा की सफलता को पूरे जिले के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा की नई किरण बनकर उभरा है। अनीशा कुमारी का सफल क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि समय पर पहचान और सही उपचार से बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता है। मैं आरबीएसके की पूरी टीम, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए हार्दिक बधाई देता हूं।”उन्होंने आगे कहा कि जिले के सभी अभिभावकों से मेरी अपील है कि यदि किसी बच्चे में जन्मजात कोई असामान्यता दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें और न ही सामाजिक संकोच के कारण छिपाएं। निकटतम स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र या आरबीएसके टीम से संपर्क करें। समय पर जांच और उपचार से बच्चे को सामान्य और सम्मानजनक जीवन मिल सकता है।”
सिविल सर्जन ने बताया समय पर इलाज क्यों है जरूरी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि क्लेफ्ट लिप एवं क्लेफ्ट पैलेट केवल चेहरे की विकृति नहीं है। यदि समय पर उपचार न कराया जाए तो बच्चे को दूध पीने, भोजन करने, स्पष्ट बोलने और कई बार सुनने में भी कठिनाई हो सकती है। इससे बार-बार संक्रमण का खतरा बढ़ता है और बड़े होने पर सामाजिक एवं मानसिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।”उन्होंने आगे कहा कि समय पर सर्जरी होने से बच्चा सामान्य रूप से भोजन कर सकता है, उसकी वाणी का विकास बेहतर होता है, चेहरे की बनावट में सुधार आता है और वह बिना किसी हीन भावना के समाज में आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सकता है। अनीशा कुमारी का सफल ऑपरेशन इस बात का उदाहरण है कि आरबीएसके के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी उच्चस्तरीय और महंगा उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा सकता है। हमारा संकल्प है कि जिले का कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण उपचार से वंचित न रहे।”
एक छोटी मुस्कान, जिसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी
आज अनीशा कुमारी के चेहरे पर लौटती मुस्कान केवल एक सफल सर्जरी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास, संवेदनशीलता और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की सफलता की कहानी है जिसने एक गरीब परिवार के जीवन में नई रोशनी भर दी। कभी अपनी बेटी के भविष्य को लेकर हर पल चिंतित रहने वाले रोनित बसाक और राखी देवी अब उसके उज्ज्वल भविष्य के सपने देख रहे हैं।यह कहानी बताती है कि जब सरकारी योजनाएं सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो वे केवल इलाज नहीं करतीं, बल्कि टूटते हुए विश्वास को फिर से जोड़ती हैं, मां की आंखों में उम्मीद के आंसू लौटाती हैं और समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक यह संदेश पहुंचाती हैं कि हर बच्चे को स्वस्थ, सम्मानजनक और मुस्कुराते हुए जीवन जीने का अधिकार है।






















