नजरिया न्यूज़, अररिया।
अररिया जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन और बच्चों के सुरक्षित, शिक्षित एवं सशक्त भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से मंगलवार को डीआरडीए सभागार, समाहरणालय परिसर में जिला स्तरीय समन्वय, परामर्श एवं उन्मुखीकरण बैठक का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रथम (प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन) द्वारा यूनिसेफ तथा महिला एवं बाल विकास निगम एवं आईसीडीएस, अररिया के सहयोग से आयोजित किया गया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य “बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत (CMFGP)” के निर्माण हेतु विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करना तथा पंचायत स्तर पर प्रभावी रणनीति तैयार करना था। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (ICDS), जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक, पुलिस विभाग के डीएसपी, बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्ष, जीविका के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक के दौरान बाल विवाह की वर्तमान स्थिति, इसके सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और यह कानूनन दंडनीय अपराध भी है। प्रतिभागियों को बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत अभियान के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली एवं इसके सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदमों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि बिहार में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है और अररिया भी इस चुनौती से प्रभावित जिलों में शामिल है। ऐसे में पंचायत स्तर पर सामूहिक एवं सतत प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में ग्राम पंचायतों की भूमिका, बाल संरक्षण समितियों के सक्रियकरण, जोखिमग्रस्त परिवारों की पहचान, विद्यालय से बाहर बच्चों का पुनः नामांकन, सामुदायिक निगरानी तंत्र को मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर अभिसरण पर भी चर्चा हुई। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बाल विवाह रोकथाम, किशोर-किशोरियों की शिक्षा और बाल संरक्षण व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अररिया जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया। साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों द्वारा स्वेच्छा से लगभग 15 ग्राम पंचायतों का चयन कर उन्हें CMFGP मॉडल के तहत विकसित करने की जिम्मेदारी ली गई। इस पहल को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर निरंतर कार्य करने का भी निर्णय लिया गया।






















