नजरिया न्यूज़, अररिया। कुमार श्रीवास्तव।
अररिया मंडल कारा के उपाधीक्षक प्रवीण कुमार को एक बांग्लादेशी विचाराधीन बंदी की रिहाई में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विदेशी नागरिक की रिहाई के दौरान निर्धारित नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया गया, जो प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर त्रुटि मानी गई है।
जानकारी के अनुसार, बांग्लादेशी नागरिक नवाब उर्फ मो. सुब्हान अली को पासपोर्ट संबंधी नियमों के उल्लंघन सहित अन्य आरोपों में गिरफ्तार किए जाने के बाद 6 अक्टूबर 2024 को न्यायालय के आदेश पर अररिया मंडल कारा भेजा गया था। वह विचाराधीन बंदी के रूप में जेल में रह रहा था। बाद में स्थानीय न्यायालय द्वारा 31 जनवरी 2026 को उसकी रिहाई का आदेश जारी किया गया।
गृह विभाग की जांच में सामने आया कि बंदी को जेल भेजे जाने के समय दर्ज पते और रिहाई आदेश में उल्लिखित पते में स्पष्ट अंतर था। इसके बावजूद जेल प्रशासन द्वारा न तो उसकी पहचान का समुचित सत्यापन कराया गया और न ही विदेशी नागरिकों की रिहाई से संबंधित निर्धारित एसओपी का पालन किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि उपाधीक्षक प्रवीण कुमार ने मामले में किसी वरिष्ठ अधिकारी से स्पष्ट निर्देश नहीं लिया और न ही इसकी सूचना मुख्यालय को दी।
विभागीय आदेश में कहा गया है कि विदेशी नागरिक की रिहाई जैसे संवेदनशील मामले में आवश्यक सतर्कता बरतना अनिवार्य था। बिना सत्यापन और आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किए बंदी को रिहा कर देना गंभीर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता तथा अनुशासनहीनता का परिचायक है। इसी आधार पर उपाधीक्षक के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बंदी नवाब ने अररिया जिले के मोरांगी टोला, रामपुर कोदरकट्टी (वार्ड संख्या-7) को अपना वर्तमान पता बताया था, जबकि उसने बांग्लादेश के चपई जिले के देवीपुर वार्ड संख्या-7 को अपना स्थायी पता दर्ज कराया था। दोनों पतों में अंतर होने के बावजूद इस संबंध में कोई विशेष सत्यापन नहीं कराया गया।
मामले के प्रकाश में आने के बाद कारा प्रशासन और गृह विभाग के स्तर पर विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की चूक राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के लिए गंभीर विषय है। विभागीय कार्रवाई के बाद संबंधित मामले की निगरानी और जांच की प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की संभावना है।






















