नजरिया न्यूज़, अररिया।
अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड अंतर्गत छतियौन गांव निवासी सिमांचल यूवा जागरण मोर्चा के संरक्षक कारे लाल मंडल ने जिले में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की। उन्होंने नजरिया न्यूज़ डिजिटल को बताया कि अररिया जैसे कृषि प्रधान जिले में अब सबसे अधिक आवश्यकता कृषि विश्वविद्यालय की है। इस संबंध में उन्होंने जिला पदाधिकारी को आवेदन देने की बात की है। सरकार से जल्द से जल्द अररिया में कृषि विश्वविद्यालय शुरू कराने की मांग की है।
कारे लाल मंडल का कहना है कि अररिया की अधिकांश आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। यहां के किसान मक्का, धान, गेहूं और जूट जैसी फसलों की खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। किसानों की मेहनत जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है, लेकिन इसके बावजूद किसान आज भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। बदलते समय में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करना अब जरूरी हो गया है। ऐसे में किसानों तक आधुनिक कृषि ज्ञान और तकनीक की पहुंच बढ़ाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सिमांचल यूवा जागरण मोर्चा के अध्यक्ष गगन कुमार झा ने कहा कि अररिया की सबसे बड़ी समस्या हर वर्ष आने वाली बाढ़ है। बाढ़ के कारण हजारों किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं और खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। कई किसान हर साल नई शुरुआत करने को मजबूर हो जाते हैं। यदि जिले में कृषि विश्वविद्यालय स्थापित होता है, तो स्थानीय परिस्थितियों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखकर शोध कार्य किए जा सकते हैं। इससे ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन और प्राकृतिक आपदाओं से कम नुकसान संभव हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि आज आधुनिक खेती में उन्नत बीज, मिट्टी परीक्षण, मौसम आधारित खेती और नई तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों के अधिकतर किसान इन जानकारियों से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। जानकारी के अभाव में कई बार खेती की लागत बढ़ जाती है और उत्पादन उम्मीद के अनुसार नहीं मिल पाता। कृषि विश्वविद्यालय किसानों को प्रशिक्षण, वैज्ञानिक सलाह और नई तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कृषि विश्वविद्यालय खुलने से सीमांचल क्षेत्र के छात्रों को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। अभी कृषि शिक्षा के लिए छात्रों को दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है, जबकि कई छात्र आर्थिक अभाव के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते। स्थानीय स्तर पर कृषि शिक्षा उपलब्ध होने से किसानों के बेटे-बेटियां आधुनिक कृषि, पशुपालन, कृषि तकनीक और कृषि आधारित उद्योगों में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
अररिया पहले से ही मक्का उत्पादन के लिए अपनी अलग पहचान रखता है। यदि यहां वैज्ञानिक शोध और तकनीकी मार्गदर्शन की मजबूत व्यवस्था हो, तो कृषि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है। साथ ही कृषि आधारित छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।
कारे लाल मंडल ने कहा कि विकास केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जो किसानों और खेती को मजबूत बनाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी, ताकि भविष्य में अररिया के किसानों और युवाओं को नई संभावनाएं मिल सकें।




















