– द्वितीय विश्व युद्ध में छह-सात करोड़ लोग मारे गए थे …
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 1मई 2026।
इतिहास में सबसे अधिक नरसंहार द्वितीय विश्व युद्ध 1939-1945 के दौरान हुआ था, जिसमें अनुमानित 7 से 8 करोड़ से अधिक लोग मारे गए थे। इस दौरान नाज़ी जर्मनी द्वारा यहूदियों का होलोकॉस्ट (Holocaust) (लगभग 60 लाख यहूदियों की सामूहिक हत्या) और सोवियत संघ के खिलाफ युद्ध सबसे भीषण नरसंहार थे। एडॉल्फ हिटलर के नेतृत्व में, नाज़ियों ने 60 लाख यहूदियों और 50 लाख से अधिक युद्धबंदियों की योजनाबद्ध तरीके से हत्या की थी। युद्ध के कारण दुनिया भर में सैनिक और नागरिक मिलाकर 7-8 करोड़ से ज्यादा लोग मारे गए थे। रवांडा नरसंहार (1994)में 100 दिनों में लगभग 10 लाख लोग मारे गए थे।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से, यूरोप में स्ब्रेबेनिका नरसंहार (1995) को सबसे बड़ा नरसंहार माना जाता है, जिसमें 8,000 बोस्नियाई मारे गए थे। वहीं कलिंग युद्ध में एक लाख से अधिक लोग मारे गए थे। इस युद्ध में नरसंहार को देखकर सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने युद्ध नीति (भेरीघोष) को छोड़कर धम्म विजय (धम्मघोष) को अपनाया। फिलहाल,ईरान और अमेरिका देश एक और दूसरे से लगभग 11हजार किमी दूर हैं।युद्ध का मुख्य कारण सीमा विवाद नहीं अपितु खनिज संपदाएं हैं।
अघोषित कारणों में ईरान इलाके की खनिज संपदा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान क्षेत्र के सभी देशों पर उसका वर्चस्व मार्च 2026की तरह कायम रहे। अमेरिका की इस वर्चस्ववादी नीति का विरोध ईरान और अप्रत्यक्ष तौर पर रूस तथा चीन देश कर रहे हैं!
गैस और ईंधन पर ईरान सहित सभी खाड़ी देश अपनी संप्रभुता बनाए रखने चाहते हैं। इस पर विश्व के अधिकांश देश एकमत हैं। अमेरिका इससे असहमत है। वह लगभग 11हजार किमी दूर स्थित ईरान में शासन व्यवस्था बदलना चाहता है। सोवियत रूस और चीन की नीतियां इससे तालमेल नहीं खा रही हैं। इसलिए ईरान को अमेरिका द्वारा झुकाने की नीति कभी भी सफल नहीं होगी। अमेरिका सफल तभी होगा जब अधिकांश खाड़ी देश सहित सोवियत रूस और चीन उसकी नीतियों का समर्थन करें, ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच की सीधी हवाई दूरी एआई के मुताबिक लगभग 11,000 से 11,800 किलोमीटर से अधिक) है। यह दूरी हवा के रास्ते मापी गई है, जिसमें ईरान की राजधानी तेहरान और अमेरिका के प्रमुख शहरों (जैसे वॉशिंगटन) के बीच की दूरी शामिल है, जो लगभग 10,169 किमी से 11,600 किमी के बीच है।
*प्रतिबंध पर विवाद* : ईरान चाहता है कि उस पर लगे सभी प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए।ईरान को यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) का अधिकार मिले और IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के खिलाफ प्रस्ताव खारिज हों। अमेरिका अपने सभी सैनिकों को क्षेत्र से हटाए। इन वार्ताओं में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है। वहीं, ट्रम्प प्रशासन इन शर्तों पर विचार करने का असफल प्रयास रहा है।
वह ईरान के परमाणु का शांति पूर्ण कार्यक्रम को रोकना चाहता है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजने पर सहमत हो जाए। ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को बंद कर दें। अमेरिका चाहता है कि ईरान क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह, हमास का समर्थन करना बंद करे और मध्य पूर्व में अपनी सैन्य पहुंच सीमित करें।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को ईरान नहीं रोकेगा।
ईरान चाहता है कि जलडमरूमध्य में जहाजों की नाकाबंदी अमेरिका खत्म करे। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति यथावत रहे।
निष्कर्ष यह है कि अमेरिका का अप्रत्यक्ष एजेंडा ईरान और अमेरिका समझौते में रोड़ा बना हुआ है।






















