फारबिसगंज (अररिया ) से लौट कर रूबी विनीत की रिपोर्ट।
जिले के फारबिसगंज अनुमंडल स्थित रूंगटा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (RITM) परिसर में शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा एवं अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर एक संयुक्त सामाजिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में शांति, करुणा एवं श्रमिकों के सम्मान के मूल्यों को बढ़ावा देना रहा।
इस अवसर पर वक्ताओं ने गौतम बुद्ध के जीवन एवं उनके उपदेश—अहिंसा, सत्य, करुणा और मध्यम मार्ग—पर प्रकाश डाला तथा मजदूर दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए श्रमिकों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम के अंतर्गत संस्थान परिसर में कार्यरत श्रमिकों के बीच फल एवं आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया, जिसमें सेवा और मानवता के मूल्यों को प्रमुखता दी गई।
इस अवसर पर एमडीएमएस, अररिया के निदेशक डॉ. संजय प्रधान, RITM के प्राचार्य डॉ. राशिद हुसैन, प्रशासनिक पदाधिकारी श्री एस.बी. कुमार, पुस्तकालयाध्यक्ष श्रीमती इंदु कुमारी, श्री उत्कर्ष कुमार एवं अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
अपने वक्तव्य में डॉ. संजय प्रधान ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज ही के दिन वेल्लोर में स्थापित रामकृष्ण मठ मानव सेवा के आदर्श का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गरीबों की सेवा करना मंदिर में पूजा करने से भी बढ़कर है और यही सच्ची मानवता है।
अपने संदेश में आर.के. रूंगटा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महावीर प्रसाद रूंगटा ने कहा कि संस्थान की प्रगति में श्रमिकों, तकनीकी कर्मचारियों एवं अभियंताओं का सतत योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो निरंतर संस्थान की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ एवं उन्नत बनाने में लगे हुए हैं।
ट्रस्टी श्रीमती उर्मिला रूंगटा ने कहा कि सेवा, परिश्रम और समर्पण ही समाज एवं संस्थान को मजबूत बनाते हैं।
प्राचार्य डॉ. राशिद हुसैन ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ श्रम के सम्मान का भाव विद्यार्थियों में विकसित करना आवश्यक है।
प्रशासनिक पदाधिकारी श्री एस.बी. कुमार ने भी संस्थान के विकास में निरंतर कार्यरत श्रमिकों एवं अभियंताओं के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गौतम बुद्ध ने महात्मा गांधी से बहुत पहले ही सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का मार्ग दिखाया, जो आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम में शिक्षकगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। आयोजन का समापन शांति, समानता, श्रम सम्मान एवं सेवा की भावना को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।






















