एसएनसीयू-01 जनवरी से 18 फरवरी के बीच 103 नवजात भर्ती किए गए, जिनमें से 75 स्वस्थ होकर घर लौटे हैं। खास यह है कि 10 नवजात निजी अस्पतालों से रेफर होकर आए और उनका भी सफल इलाज किया गया: सीएस
वीरेंद्र चौहान नजरिया न्यूज ब्यूरो किशनगंज, 17 मार्च।
नवजात शिशुओं के जीवन की सबसे नाज़ुक घड़ी में जब परिवारों की उम्मीदें कमजोर पड़ने लगती हैं, उस समय सदर अस्पताल का एसएनसीयू एक मजबूत सहारा बनकर उभर रहा है। यहां सिर्फ गंभीर रूप से बीमार नवजातों का इलाज ही नहीं होता, बल्कि उन परिवारों को भी नई उम्मीद मिलती है, जो निराशा की स्थिति में अस्पताल का रुख करते हैं। विशेष बात यह है कि अब यह इकाई न केवल सरकारी संस्थानों से आने वाले, बल्कि निजी अस्पतालों से रेफर होकर पहुंचने वाले नवजातों के लिए भी जीवनदायिनी साबित हो रही है।इसी प्रभावी भूमिका और लगातार सामने आ रही सफलता की कहानियों को ध्यान में रखते हुए जिले के मीडिया प्रतिनिधियों को शनिवार को सदर अस्पताल किशनगंज स्थित एसएनसीयू का भ्रमण कराया गया। इस दौरान मीडिया कर्मियों ने नवजातों की देखभाल, उपलब्ध आधुनिक उपकरणों और उपचार की पूरी प्रक्रिया को नजदीक से देखा और समझा।
हर मिनट की अहमियत को मीडिया ने किया महसूस
जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार ने बताया कि भ्रमण के दौरान जिले के प्रमुख मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने वार्मर, ऑक्सीजन सपोर्ट, मॉनिटरिंग सिस्टम और संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्थाओं को देखा। एसएनसीयू के चिकित्सकों ने बताया कि कम वजन, समय से पहले जन्मे या संक्रमण से ग्रसित नवजातों का किस तरह विशेष प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया जाता है।मीडिया प्रतिनिधियों ने यह भी समझा कि नवजात उपचार में एक-एक मिनट कितना महत्वपूर्ण होता है और समय पर अस्पताल पहुंचना ही जीवन बचाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
समय पर रेफरल से बच रही हैं नन्ही जिंदगियां
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि एसएनसीयू आज जिले में नवजात जीवन सुरक्षा की सबसे अहम कड़ी बन चुका है।उन्होंने बताया, “नवजात के जीवन में पहला 60 मिनट ‘गोल्डन ऑवर’ होता है। यदि इस दौरान बच्चे को सही उपचार मिल जाए, तो अधिकांश मामलों में उसकी जान बचाई जा सकती है। 01 जनवरी से 18 फरवरी के बीच 103 नवजात भर्ती किए गए, जिनमें से 75 स्वस्थ होकर घर लौटे हैं। खास बात यह है कि 10 नवजात निजी अस्पतालों से रेफर होकर आए और उनका भी सफल इलाज किया गया, जो इस इकाई की क्षमता को दर्शाता है।
मीडिया से जागरूकता बढ़ेगी, समय पर निर्णय लेंगे लोग
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कहा कि नवजात स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है और इसमें मीडिया की भूमिका निर्णायक है।उन्होंने कहा कि जब मीडिया वास्तविक उदाहरणों और सटीक जानकारी को लोगों तक पहुंचाता है, तो समाज में विश्वास और समझ दोनों बढ़ते हैं। एसएनसीयू जैसी सुविधाओं का पूरा लाभ तभी मिल पाएगा, जब लोग समय पर लक्षण पहचानकर अस्पताल पहुंचेंगे।
जागरूकता के लिए मीडिया से किया गया सहयोग का आह्वान
भ्रमण के दौरान सिविल सर्जन ने मीडिया प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने माध्यमों से नवजात में दिखने वाले खतरनाक लक्षणों और समय पर उपचार की आवश्यकता को व्यापक स्तर पर प्रसारित करें। उन्होंने कहा कि गलत धारणाओं और देरी की प्रवृत्ति को खत्म करना बेहद जरूरी है, तभी नवजात मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकती है।यह एसएनसीयू विज़िट इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, समय पर रेफरल—चाहे वह सरकारी हो या निजी—और जागरूक समाज मिलकर नवजात जीवन सुरक्षा को एक नई दिशा दे सकते हैं। यहां हर दिन नन्ही जिंदगियों को नया जीवन मिल रहा है और माता-पिता के चेहरे पर लौटती मुस्कान इस व्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता है।





















