नजरिया न्यूज़, फारबिसगंज/अररिया।
जोगबनी सीमा से सटे पड़ोसी देश नेपाल के बिराटनगर निवासी पत्रकार अर्जुनकुमार आचार्य पर चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान हुए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा की गई है। इस घटना को लेकर आसियान इंटरनेशनल जर्नलिस्ट काउंसिल के निदेशक राजेश कुमार शर्मा सहित भारत और नेपाल के विभिन्न पत्रकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हमला गुरुवार की शाम करीब 5 बजे नेपाल के कमल गाउँपालिका अंतर्गत जीवन चौक पर हुआ। उस समय नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में घर-घर प्रचार अभियान चल रहा था। प्रचार के दौरान कुछ महिलाओं द्वारा चुनाव चिह्न ‘घंटी’ पर वोट देने की अपील करने पर एमाले से जुड़े कार्यकर्ताओं ने महिलाओं के साथ अश्लील गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे पत्रकार अर्जुनकुमार आचार्य पर एमाले से जुड़े ‘वॉलंटियर्स फोर्स’ के सदस्यों ने अचानक हमला कर दिया और मुक्कों व बूटों से बेरहमी से पिटाई की।
घायल पत्रकार आचार्य ने शुक्रवार की संध्या दमक स्थित इलाका पुलिस कार्यालय में प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी में कमल गाउँपालिका-6 के युवराज पाठक सहित पांच लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इसमें अभद्र व्यवहार से जुड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाने, लूटे गए मोबाइल फोन व चश्मा वापस दिलाने, शारीरिक-मानसिक क्षतिपूर्ति और इलाज का खर्च दिलाने की मांग की गई है।
पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि घटना के समय ओली घटनास्थल से कुछ ही मीटर की दूरी पर मौजूद थे, लेकिन अपने ही समर्थकों द्वारा पत्रकार पर किए गए हमले को लेकर उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। प्राथमिकी में यह भी उल्लेख है कि हमले के बाद आचार्य को अपहरण के इरादे से बागमती अंचल में पंजीकृत 2561 नंबर की सफेद स्कॉर्पियो में जबरन बैठाने की कोशिश की गई और दमक ले जाकर “सबक सिखाने” की धमकी दी गई। हमले में आचार्य के चेहरे, पीठ, बगल और सिर में चोटें आईं, हालांकि इलाज के बाद उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
इलाका पुलिस कार्यालय दमक के पुलिस उपाधीक्षक किशोर लम्साल ने बताया कि प्राथमिकी में नामजद आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी तलाश जारी है। इस घटना पर नेपाल पत्रकार महासंघ, फ्रीडम फोरम सहित कई संचार संगठनों ने प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले की निंदा करते हुए दोषियों को शीघ्र कानूनी दायरे में लाने की मांग की है।























