नजरिया न्यूज़, अररिया।
अररिया जिले में एक बार फिर कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति के हाथ पीछे की ओर मोड़कर रस्सी से बांध दिए गए हैं और कुछ लोग उसे लाठी-डंडों से बेरहमी से पीट रहे हैं। दृश्य इतने भयावह हैं कि वीडियो देखने वाले लोग सिहर उठे हैं।
हालांकि इस वायरल वीडियो की पुष्टि नजरिया न्यूज़ नहीं करता है, लेकिन जिस तरह से खुलेआम एक व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है, उसने समाज में बढ़ते भीड़तंत्र की प्रवृत्ति को उजागर कर दिया है। वीडियो देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोगों के मन से पुलिस और कानून का डर खत्म होता जा रहा है और वे खुद ही न्यायाधीश बनने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यह घटना सोनमणि गोदाम क्षेत्र की है। वीडियो में मार खा रहे व्यक्ति को कुछ लोग “पागल” बता रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या किसी भी परिस्थिति में किसी नागरिक को कानून हाथ में लेने का अधिकार है? भारतीय कानून में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से बांधकर पीटा जाए, चाहे उस पर कोई भी आरोप क्यों न हो।
मामले को लेकर आरक्षित अधीक्षक जितेंद्र कुमार एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुशील कुमार ने पुष्टि की है कि घटना सोनमणि गोदाम क्षेत्र की ही है। अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में आवेदन प्राप्त कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना 10 अगस्त 2024 की घटना की याद दिलाती हैं।
इस ताजा घटना ने 10 अगस्त 2024 की उस शर्मनाक घटना की भी याद ताजा कर दी है, जब एक कथित मोटरसाइकिल चोर को पकड़कर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया था। उस समय भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आरोपी के प्राइवेट पार्ट में मिर्च लगाने जैसी घिनौनी हरकत सामने आई थी। उस प्रकरण में तत्कालीन आरक्षी अधीक्षक अमित रंजन ने सख्त रुख अपनाते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
दोनों घटनाओं में एक समानता साफ दिखती है—भीड़ द्वारा खुद न्याय करने की कोशिश। हालांकि अंतर यह बताया जा रहा है कि पहले मामले में आम लोगों की भीड़ शामिल थी, जबकि सोनमणि गोदाम की घटना में कुछ जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका होने की चर्चा है, जो वीडियो में भी स्पष्ट दिखाई दे रही है। यही कारण है कि यह मामला और अधिक गंभीर बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभ में सोनमणि थाना में आवेदन दर्ज करने में देरी हुई, लेकिन वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज किया गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बिना दबाव के निष्पक्ष कार्रवाई संभव नहीं थी?
फिलहाल पुलिस जांच की बात कह रही है और दावा किया जा रहा है कि वीडियो की सत्यता की जांच कर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना एक बार फिर समाज के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या हम कानून के राज से हटकर भीड़तंत्र की ओर बढ़ रहे हैं? अब निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस बार भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।























