=प्रशासन जनता के पास नहीं रहता: मोहन भागवत
नजरिया न्यूज, पटना, 04अक्टूबर।
मोहन भागवत ने कहा, “प्राकृतिक उथल-पुथल है तो जन-जीवन में भी उथल-पुथल दिख रहा है।
प्रशासन जनता के पास नहीं रहता, संवेदनशील नहीं रहता, लोकाभिमुख नहीं रहता… जनता की अवस्थाओं को ध्यान में रख कर नीतियां नहीं बनतीं, तो असंतोष रहता है। परंतु उस असंतोष का ( श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल की तरह)इस प्रकार व्यक्त होना, यह किसी के लाभ की बात नहीं है.”
भागवत ने यह भी कहा, “प्रजातांत्रिक मार्गों से भी परिवर्तन आता है।ऐसे हिंसक मार्गों से परिवर्तन नहीं आता है।एक उथल-पुथल हो जाती है लेकिन स्थिति यथावत रहती है।”
साथ ही उन्होंने कहा कि अगर दुनिया का इतिहास देखा जाए तो जब से “ये उथल-पुथल वाले तथाकथित रिवॉल्यूशन (क्रांतियां) आए” तो किसी क्रांति ने अपने उद्देश्य को प्राप्त नहीं किया।उन्होंने कहा, “ऐसे हिंसक परिवर्तनों से उद्देश्य नहीं प्राप्त होता है। उलटा इस अराजकता की स्थिति में देश के बाहर की स्वार्थी ताक़तों को अपने खेल खेलने का मौक़ा मिलता है।”






















