नजरिया न्यूज़, अररिया। विकाश प्रकाश।
शारदीय नवरात्र के समापन पर शुक्रवार, 3 अक्टूबर को अररिया में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का भव्य विसर्जन किया गया। मौसम की खराबी के कारण दशहरा के दिन टल चुके विसर्जन ने श्रद्धालुओं के उत्साह को और बढ़ा दिया। शहर में आस्था, भक्ति और सामाजिक सौहार्द का अद्भुत संगम देखने को मिला।
परंपरा से जुड़े आस्था के पल
अररिया की अनोखी परंपरा के अनुसार, पूजा समितियों के सदस्य मां की प्रतिमाओं को कंधों पर उठाकर हृदयस्थली चांदनी चौक तक लाते हैं। दशकों पुरानी इस परंपरा के कारण यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक मिलन का केंद्र बन जाता है। चांदनी चौक पर एकत्र होने के बाद प्रतिमाओं की भव्य शोभायात्रा काली मंदिर चौक होते हुए परमान नदी के त्रिशूलिया घाट तक पहुंची।
भक्तों का जनसैलाब
शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पुरुष, महिलाएं और बच्चे मां के जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए। जगह-जगह लोग मां को विदाई देने के लिए दीप जलाते और पुष्प अर्पित करते दिखे। यात्रा के दौरान भक्तों का उत्साह और भावुकता दोनों देखने को मिले।
शांति और सुरक्षा के लिए प्रशासन की सतर्कता
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरती। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। यातायात व्यवस्था को मजबूत रखा गया, जिससे विसर्जन यात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। प्रशासन की इस पहल की आम जनता ने सराहना की।
सेवा में आगे आए सामाजिक संगठन
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चांदनी चौक पर ओम प्रकाश भगत, सद्भावना मंच, हिंद पार्टी और काली मंदिर चौक पर नगर परिषद द्वारा पानी और शरबत के स्टॉल लगाए गए। इन सेवाओं ने समाज में सहयोग और भाईचारे का संदेश दिया।
सामाजिक सौहार्द की मिसाल
दशहरा का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द और एकता का प्रतीक भी बना। अलग-अलग समुदायों और वर्गों के लोग एक साथ मां की विदाई में शामिल हुए। इसने अररिया की सांस्कृतिक परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूत किया।
सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
विसर्जन के दौरान पूरा शहर भक्ति और उल्लास के रंग में डूबा रहा। नवरात्र और दशहरा के समापन ने यह साबित किया कि अररिया न केवल अपनी आस्था बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी जाना जाता है।
इस भव्य आयोजन के बाद अररिया के श्रद्धालु अब अगले वर्ष के नवरात्र का इंतजार कर रहे हैं, जब फिर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित होंगी और उसी श्रद्धा और सौहार्द के साथ विदाई दी जाएगी।























