दुर्केश सिंह संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 17अगस्त।
राहुल गांधी के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। डिजिटल मतदाता सूची की उपलब्धता पर भी मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रेसवार्ता में बातचीत नहीं हुई। मतदाता सूची में गड़बड़ी को यह कहकर खारिज कर दिया गया:मैं झूठे आरोपों से नहीं डरता।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा,वे झूठे आरोपों से नहीं डरते हैं।सवाल है कि झूठा आरोप कौन लगाया है। वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में बिहार में एसआईआर कार्य जारी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने 65लाख मतदाताओं का नाम खारिज करने की जानकारी दी है। राजनीतिक दलों ने खारिज नामों की सूची मांगी तो मुख्य चुनाव आयुक्त ने कानूनी अड़चन बताते हुए सूची देने से इनकार कर दिया। अब सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद खारिज किए गए सभी 65लाख मतदाताओं के नामों की जानकारी और नाम खारिज करने का कारण विज्ञापन के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त को देना पड़ेगा। वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी होने का आरोप लगाया है। गड़बड़ी को उजागर भी किया है। और गड़बड़ी उजागर करने के लिए राहुल गांधी ने डिजिटल मतदाता सूची की मांग की है। जिस पर आज मुख्य चुनाव आयुक्त चुप रहे। सूची की जांच वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त करवा सकते हैं।
नजरिया न्यूज -डिजिटल मतदाता सूची राहुल गांधी मांग रहे हैं।आज प्रेसवार्ता में मुख्य चुनाव ज्ञानेश कुमार द्वारा राहुल गांधी की उक्त मांग पर चुप रहना चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करता है?
फिलहाल,आज की प्रेस वार्ता में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल में मतदाता सूची की जांच कराने की जानकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने दी लेकिन पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त का नाम लिए बगैर राजनीतिक दलों को संदेश दिया कि झूठे आरोपों से हम डरने वाले नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि 2024में सम्पन्न लोकसभा चुनाव और उससे पहले संपन्न विधानसभा चुनाव की डिजिटल मतदाता सूची राजनीतिक दल वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त से मांग रहे हैं,जो नहीं दी जा रही है। इस संदर्भ में आज की प्रेसवार्ता में कुछ भी नहीं बोलना चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस वार्ता में कहा, “भारत के संविधान के अनुसार, 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले भारत के प्रत्येक नागरिक को मतदाता बनना चाहिए और मतदान भी करना चाहिए। आप सभी जानते हैं कि, कानून के अनुसार, प्रत्येक राजनीतिक दल का जन्म चुनाव आयोग में पंजीकरण के माध्यम से होता है। फिर चुनाव आयोग समान राजनीतिक दलों के बीच भेदभाव कैसे कर सकता है?”






















