- गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के विकास में आयोडीन की भूमिका अहम
- गर्भवती महिलाओं के लिये जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है आयोडीन
अररिया, 15 मई।
आयोडीन हमारे शरीर के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है। यह हमारे शरीर की वृद्धि, विकास व हमारे मस्तिष्क की क्रियाशीलता को नियंत्रित करता है। गर्भवती महिला व गर्भस्थ शिशु के मामले में शरीर में आयोडीन की समुचित मात्रा और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य व गर्भ में पल रहे शिशु के सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास में आयोडीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। आयोडीन की कमी से गर्भवती महिलाओं में थायरॉयड संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जबकि गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क का विकास बाधित हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान संतुलित मात्रा में आयोडीन का सेवन बेहद जरूरी होता है।
शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है आयोडीन
सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ आकाश ने बताया कि आयोडीन हमारे शरीर के लिये आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है। गर्भवती महिला व गर्भस्थ शिशु के मामले में यह और भी महत्वपूर्ण है। आयोडीन की कमी के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे को गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। आयोडीन की कमी से शिशु में मानसिक मंदता, बोलने में कठिनाई, बौद्धिक विकास में बाधा व जन्मजात गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। आयोडीन की पर्याप्त मात्रा गर्भावस्था के दौरान हार्मोन के संतुलन को बनाये रखता है। जो शिशु के मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र के विकास के लिये जरूरी है। गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में इसका महत्व और भी अधिक होता है। इस दौरान शिशु के मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है।
गर्भस्थ शिशु के सर्वांगीण विकास के लिये आयोडीन जरूरी
सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने कहा कि आयोडीन की पर्याप्त मात्रा गर्भावस्था के दौरान हार्मोन के संतुलन को बनाये रखता है। जो शिशु के मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र के विकास के लिये जरूरी है। शरीर में आयोडीन की कमी होने पर त्वचा का शुष्क होना, बालों का झड़ना, आवाज में भारीपन, आलस्य व नींद, श्वास व हृदय संबंधी परेशानी, डिप्रेशन, जोड़ों व मांसपेशियों में डर, गर्भपात, विकलांगता जैसी समस्या खड़ी हो सकती है। सामान्य व्यस्कों के लिये प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम एमसीजी आयोडीन की जरूरत होती है। वहीं गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को को प्रति दिन 200 एमसीजी आयोडिन की जरूरत होती है। गर्भावस्था के दौरान इस तरह की समस्या से बचाव के लिये नियमित अंतराल पर प्रसव पूर्व जांच को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
समुदाय को जागरूक करने की हो रही पहल
डीपीएम स्वास्थ्य संतोष कुमार ने कहा कि आयोडीन की कमी से होने वाली समस्या से बचाव के लिये स्वास्थ्य विभाग व आईसीडीएस द्वारा संयुक्त रूप से समुदाय स्तर पर जागरूकता को लेकर जरूरी पहल किये जा रहे हैं। संबंधित एएनएम, आंगनबाड़ी सेविका व आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान संतुलित मात्रा में आयोडीन के सेवन के लिये प्रेरित किया जा रहा है। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम समुदाय में आयोडीन के संतुलित मात्रा में उपयोग के लिये जागरूक किया जा रहा है।






















