- नौनिहालों को दवा पिलाकर सिविल सर्जन ने किया पल्स पोलियो अभियान की शुरूआत
- पांच दिवसीय अभियान के क्रम में 7.32 लाख बच्चों का दवा पिलाने का है लक्ष्य
अररिया, 17 नवंबर।
जिले में पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान रविवार से शुरू हुआ। इसे लेकर जोकीहाट रेफरल अस्पताल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने नौनिहालों को दो बूंद पोलियो की दवा पिलाकर अभियान का विधिवत उद्घाटन किया। मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोईज, डीपीएम संतोष कुमार, रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ राजा राम चौधरी, डब्ल्यूएचओ के आरआरटी डॉ जुनैद शफात, यूनिसेफ के एसएमसी आदित्य कुमार सिंह, यूएनडीपी के वीसीसीएम शकील आजम बीएचएम प्रवीण कुमार, बीसीएम सरवर आलम सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद थे। वहीं जिले के अन्य प्रखंडों में संबंधित प्रखंड के बीडीओ, एमओआईसी व प्रखंड प्रमुख द्वारा बच्चों को दवा पिलाकर अभियान का उद्घाटन किया गया
पोलियो से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है दो बूंद दवा
सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने कहा कि दो बूंद पोलियो की दवा बच्चों को पोलियो जैसे गंभीर रोग से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है। पोलियो को बच्चों में विकलांगता का प्रमुख कारण बताते हुए उन्होंने तमाम अभिभावकों से अपने पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों को प्रमुखता के आधार पर पोलियो की दवा पिलाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पोलियो को कोई इलाज नहीं है। टीका की मदद से ही इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिये लोगों को इसके महत्व को समझते हुए प्राथमिकता के आधार पर बच्चों का टीकाकरण कराना चाहिये।
बनाये गये हैं 1406 टीकाकरण दल व 216 ट्रांजिट टीम
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोईज ने बताया कि अभियान के क्रम में शून्य से पांच साल तक के 7.32 लाख बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने के लिये 216 ट्रांजिट टीम बनाये गये हैं। जो बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, प्रमुख चौक-चौराहों से होकर गुजरने वाले बच्चों को दवा पिलाने का काम करेंगे। घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने के लिये कुल 1406 टीकाकरण दल का गठन किया गया है। अभियान की सफलता को लेकर कुल 517 पर्यवेक्षक बहाल किये गये हैं। वहीं ईंट भट्ठा, बाजार सहित अन्य जगहों पर बच्चों को दवा पिलाने के लिये कुल 38 मोबाइल टीम का गठन किया गया है।
अभी भी बरकरार है संक्रमण के प्रसार का खतरा
स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि वर्ष 2009 के बाद जिले में पोलियो का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे देशों में पोलियो का संक्रमण अभी भी जारी है। इससे संक्रमण के प्रसार का खतरा अभी भी बरकरार है। दुनिया में कहीं भी पोलियो का एक भी मामला होने पर दूसरे मूल्कों में भी इसके प्रसार की संभावना बनी रहेगी। लिहाजा पोलियो के खिलाफ हमें अपने सुरक्षा तंत्र को ज्यादा मजबूत करने की जरूरत है। जो शत-प्रतिशत बच्चों का दो बूंद पोलियो की दवा पिलाकर ही संभव है।






















