कुशेश्वरस्थान दरभंगा।
कुशेश्वरस्थान में सावन के अंतिम एवं पांचवें सोमवारी को बाबा कुशेश्वरनाथ के पुजा अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को लेकर प्रशासनिक और मंदिर न्यास समिति ने व्यापक तैयारी किया है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के ख्याल से मंदिर में प्रवेश करने के लिए कतारबद्ध होने के साथ ही चंद्र कुप से जल लेने और मंदिर के गर्भ गृह तक पहुंचने के लिए महिला और पुरुष की अलग अलग बेरिकेडिंग किया गया है। जानकारों के अनुसार कई वर्षों के बाद 29 दिनों की सावन माह में 5 सोमवारी हो रहा है और इस माह के पूर्णिमा की तिथि को अंतिम सोमवारी के साथ साथ भाई बहन के अटूट बंधन का पर्व रक्षाबंधन भी इसी दिन है।
आम तौर पर चाहें दिन कोई भी हो रक्षा बंधन को कुशेश्वर नाथ महादेव को जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं का भारी भीड़ जुटती है। लेकिन इस साल रक्षा बंधन के साथ साथ सोमवारी दोनों का एक साथ पड़ने की संयोग से भारी संख्या में श्रद्धालुओं को आने की संभावना को देखते हुए तैयारी किया गया है। सावन माह में भगवान शिव के जलाभिषेक करने के महत्व के संबंध में ऋषि झा पंडा ने कहा कि इसी महीने में समुद्र को मंथन करने पर अमृत और विष सहित 14 रत्न प्राप्त हुआ था। अमरत्व प्राप्त करने के लिए मृतक ग्रहण करने के लिए देवता और दैत्य दोनों आतुर थे। इधर विष के ताप से समस्त संसार त्राहिमाम करने लगा। यह देखकर भगवान शिव संसार रुपी फुलवारी को बचाने के लिए विष को अपने गले में ग्रहण किया। तब देवताओं ने विष के प्रभाव को शांत करने के लिए भोलेनाथ को जलाभिषेक करने लगा। वहीं भगवान परशुराम ने विष के ताप को शांत करने के लिए कांवर में जल लाकर जलाभिषेक किया। तभी से कांवड़ लेकर जलाभिषेक करने की परम्परा चली आ रही है। इधर अंतिम सोमवारी के जलाभिषेक करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को स्वागत हेतु मंदिर सज-धज कर तैयार है।मंदिर को रंग बिरंगे ताजा फूल और बल्वो से सजाया गया है। जिससे शाम होते ही मंदिर एवं इसके परिसर में सतरंगी छटा बिखेरने लगता है। मंदिर में दर्शन पूजन करने की सारी व्यवस्था पूर्व की भांति लागू रहेगी। सभी प्रकार के चार चक्का वाहनों को सतीघाट से आगे बढ़ने पर प्रतिबंध लगा है तो टेम्पो और बाइक पड़ाव पांडों स्कूल में बनाया गया है।





















