= फिलहाल बजट चाहे जैसा हो, देश कितनी भी उन्नति कर लें, जबतक आम भारतवासियों को एक हजार रुपये दिहाड़ी नहीं मिलेगी, देश गरीबी के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकलेगा …
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज, 01अगस्त।
राहुल गांधी गरीबी के चक्रव्यूह में फंसे 80 फीसद भारतीयों की दयनीय दशा के लिए देश के बजट जिम्मेवार ठहराया है। बजट को ऐसा हलवा बताया जिसके निर्माण में सवर्ण गरीब सहित 80फीसद जातियों के प्रतिनिधि का कोई योगदान नहीं है। उन्होंने कहा:अपवाद स्वरूप दो-तीन अधिकारी देश के 80 फीसद जातियों में से बजट बनाने में शामिल रहे हैं।
राहुल गांधी के उक्त बयान से देश की राजनीति में उथल-पुथल जैसी हालात हैं।राहुल गांधी के बाद मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा पर 18फीसद जीएसटी लगाए जाने का विरोध किया है। इस विरोध से साफ संदेश आवाम में गया है कि बजट निर्माण में कैबिनेट मंत्रियों का कोई योगदान नहीं है क्या?
फिलहाल नितिन गडकरी के विरोध को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। नितिन गडकरी के पत्र को सोशल मीडिया पर समर्थन मिल रहा है। नितिन गडकरी का पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
लोग भी कह रहे हैं कि मरते हुए व्यक्ति से 18 फीसदी जीएसटी वसूलना अमानवीय है। यह कफन पर जीएसटी लगाने जैसा ही है।
फिलहाल बजट चाहे जैसा हो, देश कितनी भी उन्नति कर लें, जबतक आम भारतवासियों को एक हजार रुपये दिहाड़ी नहीं मिलेगी, देश गरीबी के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकलेगा ।



















