**अधिनियम का उद्देश्य नए और पहली बार के अपराधियों को अपना तरीका बदलने और जेलों में बुरे प्रभावों से दूर रहने में मदद करता है – शशिकांत राय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश
समस्तीपुर/दलसिंहसराय
(राज कुमार सिंह)
महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ गृह विभाग, पटना के निर्देश पर अनुमंडल विधिक सेवा समिति, दलसिंहसराय के तत्वावधान में अनुमंडल प्रोबेशन पदाधिकारी, दलसिंहसराय के सौजन्य से अपराधी परिवीक्षा अधिनियम 1958 विषय पर जागरूकता सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन बुधवार को अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, परिसर में किया गया। कार्यक्रम का उदघाटन विधिवत दीप प्रज्ज्वलित करते करते हुए शशिकांत राय, ए डी जे , विवेक चंद्र वर्मा, ए सी जे एम तृतीय, काजल सोनेवाला, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी, स्पर्श अग्रवाल, मुंसिफ, प्रियंका कुमारी, अनुमंडल पदाधिकारी, सविता कुमारी, भुमि सुधार उपसमाहर्ता, त्रिभुवन सिंह, कारा अधीक्षक, गंगा सागर प्रसाद, उपनिदेशक सह प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी, संजू कुमारी, संजू कुमारी, श्रेयसी कुमारी, प्रोबेशन पदाधिकारी, समस्तीपुर, विनोद कुमार पोद्दार समीर, अध्यक्ष, अधिवक्ता संघ, प्रभात कुमार चौधरी, महासचिव, अधिवक्ता संघ के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम का संबोधन करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शशिकांत राय ने कहा कि अपराधी परिवीक्षा अधिनियम 1958 में पारित हुआ। बिहार पहला राज्य है इससे संबंधित रूल 15 जून 1959 को अधिसूचित किया । व्यक्ति अपराध की ओर प्रवृत्त ना हो और जो व्यक्ति अपराध की ओर कदम बढ़ा चुके उनको मुख्य धारा में लाने का कार्य प्रोबेशन करता है । प्रोबेशन का कार्य अपराधी के अच्छाइयों का बाहर निकालने का है न कि उसके गलतियों का ।
आगे उन्होंने कहा कि यह अधिनियम अपराधियों के लिए सुरक्षात्मक उपायों पर जोर देते हुए एक व्यक्तिवादी दृष्टिकोण अपनाता है, अधिनियम की धारा 03 अपराधियों को चेतावनी के बाद रिहा करने कि अदालत की शक्ति से संबंधित है, ऐसी शर्तें प्रदान करती है जिसके तहत एक अपराधी परिवीक्षा से लाभ उठा सकता है । अधिनियम का उद्देश्य नए और पहली बार के अपराधियों को अपना तरीका बदलने और जेलों में बुरे प्रभावों से दूर रहने में मदद करना है । यह पहली बार अपराधियों को कड़ी चेतावनी के बाद रिहा करने की अनुमति देता है, यदि वे चोरी या गंभीर नहीं है । यदि अपराधी अच्छा व्यवहार करते हैं तो उन्हें छोड़ दिया जा सकता है , लेकिन यह केवल उन अपराधों पर लागू होता है जिनमें सजा के रूप में आजीवन कारावास या मृत्यदंड का प्रावधान नहीं है इसके अतिरिक्त भी उन्होंने अधिनियम से संबंधित अन्य विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विवेक चंद्र वर्मा, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तृतीय ने कहा कि यह अधिनियम कहता है कि 21 वर्ष से कम उम्र के लोगों को छोटे अपराधों के लिए जेल नहीं भेजा जाएगा, सिवाय उन्होंने गंभीर अपराध किए हो । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी प्रियंका कुमारी ने कहा कि प्रोबेशन सेवा न्यायालय के न्याय निर्णय में जीवंतता लाने का प्रयास करती है । अपराधी को सिर्फ अपराध करने की दृष्टि से न देखकर उस व्यक्ति तथा उसमें सुधार लाने की भावना से देखती है ।आगे संबोधित करते हुए उपनिदेशक सह प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी गंगा सागर प्रसाद ने कहा कि प्रोबेशन यह बताने का प्रयास करता है कि दण्ड देने बजाय माफ करके भी उसके आंतरिक गुणों को बाहर लाकर भी सुधारा जा सकता है । प्रोबेशन का कार्य जेल के सुधारात्मक कार्य से अलग है । जेल में बंदियो का पढ़ाई तथा उनके कौशल विकास तक ही सीमित है, जबकि प्रोबेशन का कार्य उससे कई गुना बड़ा है । व्यक्ति अपराध की ओर प्रवृत्त न हो और जो व्यक्ति अपराध की ओर कदम बढ़ा चुके हैं उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने का कार्य करती है । आगे संबोधित करते हुए प्रोबेशन पदाधिकारी संजू कुमारी ने कहा कि कारा से मुक्त बंदी समाज से जुड़ नहीं पाते हैं उसके अंदर हीन भावना आ जाती है तथा समाज द्वारा उन्हें सम्मान नहीं मिल पाता है ,यह दोनों स्तर पर होता है । प्रोबेशन व्यक्ति की गरिमा बढ़ाने का कार्य करती है । आगे कार्यक्रम को भुमि सुधार उपसमाहर्ता सविता कुमारी, कारा अधीक्षक त्रिभुवन सिंह इत्यादि ने भी संबोधित किया । मौके पर कार्यक्रम में अधिवक्तागण संतोष कुमार सिंह, प्रभात कुमार मिश्रा, सुखराम मोची, हीरा कुमारी , शांति कुमारी, उषा कुमारी, संजीत सिंह इत्यादि , कर्मचारीगण गंगेश झा, विशालदीप प्रकाश, चंद्रकेतु, चंदन मिश्रा, प्रकाश रंजन , संगीता झा, मुन्ना, चांद, हरीश कुमार, पारा विधिक स्वयं सेवकगण रामबाबू पासवान, सुभाष चंद्र पासवान, जितेंद्र कुमार सिंह, संजीत कुमार इत्यादि सहित सैकड़ों लोग सम्मिलित हुए ।





















