- प्रारंभिक अवस्था में कैंसर की पहचान से इसका समुचित इलाज संभव
अररिया, 25 जुलाई।
बदलते खान पान व जीवनशैली की वजह से जिले में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। समय पर रोग को पहचान व इसके समुचित इलाज कैंसर से पूरी तरह निजात पाया जा सकता है। संभावित मरीजों की जांच व जरूरी इलाज समय पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा जरूरी पहल किया जा रहा है। कैंसर से बचाव को लेकर जहां विभिन्न स्तरों पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान के लिये सदर अस्पताल में स्क्रिनिंग व बायोप्सी जैसी सुविधा लोगों को आसानी से उपलब्ध हो रहा है। अस्पताल में मुंह के कैंसर के बायोप्सी की सुविधा पहले से उपलब्ध थी। इसी कड़ी में सर्वाइकल कैंसर के बायोप्सी की सुविधा का संचालन भी अब शुरू हो चुका है। गुरुवार को अस्पताल में सर्वाइकल कैंसर के संभावित मरीज का बायोप्सी होमी भाभा कैंसर अस्पताल व अनुसंधान टीम के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया गया। टीम में डॉ शाइना आलम व नर्सिंग स्टाफ भवानी भारती शामिल थी।
सदर अस्पताल में स्क्रीनिंग व बायोप्सी की सुविधा
सर्वाइकल बायोप्सी के संबंध में डॉ साइना ने बताया कि
संभावित महिला कैंसर मरीज की सर्वाइकल बायोप्सी की गयी। इसका सैंपल जांच के लिए पटना भेजा जायेगा। उन्होंने बताया की सदर अस्पताल होमी भाभा कैंसर अस्पताल व अनुसंधान केंद्र की मदद से कैंसर ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। इसके मध्यम से कैंसर स्क्रीनिंग व जरूरी चिकित्सकीय परामर्श संबंधी सेवाएं लोगों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि किसी महिला को सफेद पानी आना, अनियमित रक्तस्राव, लंबे समय से कमर व पैरों में दर्द होना, माहवारी बंद होने के बाद बार बार माहवारी आना जैसी समस्या रहती है। उन्हें इसे गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य जांच व समुचित इलाज को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान जरूरी
सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने बताया कि सदर अस्पताल में बायोप्सी से जुड़ी सेवा की उपलब्धता काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर महिलाओं की मौत की बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लिहाजा कैंसर के कारणों के प्रति जागरूक होकर लोगों को इससे बचाव संबंधी उपायों के प्रति गंभीर होने की जरूरत है। रोग से जुड़े सामान्य लक्षण दिखने पर ही इसकी जांच व इलाज को प्राथमिकता दिया जाना चाहिए। शुरुआती दौर में रोग की पहचान होने पर इसका समुचित इलाज संभव है।





















