तालाब के नाम पर 10 लाख का घोटाला:
सिंचाई विभाग के 14 लाख के तालाब पर पंचायत ने दोबारा राशि निकालकर किया बंदरबांट
बिरसिंहपुर पाली, जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत सलैया-2 में तालाब निर्माण के नाम पर बड़े भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत द्वारा 10 लाख रुपये दोबारा स्वीकृत कराकर बिना कोई काम कराए पूरी राशि का बंदरबांट कर लिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2003-04 में दिग्विजय सिंह सरकार के समय सिंचाई विभाग द्वारा सलैया खुर्द मौहार में 14 लाख रुपये की लागत से एक तालाब का निर्माण कराया गया था। यह तालाब आज भी सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है और मौके पर मौजूद भी है।
ग्रामीणों के अनुसार इसी तालाब को ग्राम पंचायत सलैया-2 ने मरम्मत और मनरेगा योजना के तहत दोबारा स्वीकृत दिखा दिया। इसमें तालाब की गाद निकालना, मेड़ की खुदाई कर मेड के रिसाव बंद करना था और पिचिंग कार्य का प्रावधान रखा गया था। कागजों में कार्य पूर्ण बताकर लगभग 10 लाख रुपये की राशि आहरण कर ली गई, लेकिन मौके पर किसी प्रकार का कार्य नहीं कराया गया।
वर्ष 2021-22 में फिर से इसी तालाब के नाम पर जीर्णोद्धार, के नाम पर राशि निकाली गई। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब की स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो गाद निकली, न मेड़ बनी और न ही पिचिंग का काम हुआ। केवल कागजों में बिल लगाकर राशि निकाल ली गई।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत को सिंचाई विभाग की संपत्ति पर काम कराने से पहले अनुमति लेना जरूरी था, लेकिन बिना परमिशन के ही फर्जी कार्य दिखा दिया गया। इससे शासन को लाखों रुपये का चूना लगा है।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर उमरिया और सीईओ जिला पंचायत से निष्पक्ष जांच कर दोषी सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सिंचाई विभाग और पंचायत के रिकॉर्ड का मिलान कर जांच की जाए तो पूरे घोटाले का खुलासा हो जाएगा।
तालाब के नाम पर 10 लाख का घोटाला:
सिंचाई विभाग के 14 लाख के तालाब पर पंचायत ने दोबारा राशि निकालकर किया बंदरबांट
बिरसिंहपुर पाली, जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत सलैया-2 में तालाब निर्माण के नाम पर बड़े भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत द्वारा 10 लाख रुपये दोबारा स्वीकृत कराकर बिना कोई काम कराए पूरी राशि का बंदरबांट कर लिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2003-04 में दिग्विजय सिंह सरकार के समय सिंचाई विभाग द्वारा सलैया खुर्द मौहार में 14 लाख रुपये की लागत से एक तालाब का निर्माण कराया गया था। यह तालाब आज भी सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है और मौके पर मौजूद भी है।
ग्रामीणों के अनुसार इसी तालाब को ग्राम पंचायत सलैया-2 ने मरम्मत और मनरेगा योजना के तहत दोबारा स्वीकृत दिखा दिया। इसमें तालाब की गाद निकालना, मेड़ की खुदाई कर मेड के रिसाव बंद करना था और पिचिंग कार्य का प्रावधान रखा गया था। कागजों में कार्य पूर्ण बताकर लगभग 10 लाख रुपये की राशि आहरण कर ली गई, लेकिन मौके पर किसी प्रकार का कार्य नहीं कराया गया।
वर्ष 2021-22 में फिर से इसी तालाब के नाम पर जीर्णोद्धार, के नाम पर राशि निकाली गई। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब की स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो गाद निकली, न मेड़ बनी और न ही पिचिंग का काम हुआ। केवल कागजों में बिल लगाकर राशि निकाल ली गई।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत को सिंचाई विभाग की संपत्ति पर काम कराने से पहले अनुमति लेना जरूरी था, लेकिन बिना परमिशन के ही फर्जी कार्य दिखा दिया गया। इससे शासन को लाखों रुपये का चूना लगा है।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर उमरिया और सीईओ जिला पंचायत से निष्पक्ष जांच कर दोषी सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सिंचाई विभाग और पंचायत के रिकॉर्ड का मिलान कर जांच की जाए तो पूरे घोटाले का खुलासा हो जाएगा।











