- अड़गड़ा के ठिकाने से लेकर मवेशियों की सुपुर्दगी तक उठे सवाल, बजरंग दल अध्यक्ष संजय दास ने की जांच की मांग
कुआरी/अररिया। भारत-नेपाल सीमा पर मवेशी तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के बाद जब्त मवेशियों को अड़गड़ा के सुपुर्द करने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। बजरंग दल के अध्यक्ष संजय दास ने सवाल किया है कि पुलिस और एसएसबी द्वारा जब्त किए गए मवेशी अड़गड़ा में सुरक्षित भी हैं या नहीं? कहीं उन्हें बेच तो नहीं दिया गया? उन्होंने पूरे मामले की जांच कर मवेशियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
हाल ही में कुआरी थाना क्षेत्र के शीशाबाड़ी गांव के समीप भारत-नेपाल सीमा स्तंभ संख्या 166 से करीब 3.5 किलोमीटर भारतीय क्षेत्र में एसएसबी और कुआरी थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने 11 मवेशियों को बरामद किया था। इनमें आठ बैल, दो बछड़े और एक गाय शामिल थे। कार्रवाई के दौरान मवेशियों के साथ कोई व्यक्ति मौजूद नहीं मिला। इसके बाद मवेशियों को कुआरी थाना पुलिस के सुपुर्द किया गया और आगे की प्रक्रिया के तहत संबंधित फाटक यानी अड़गड़ा में रखा गया।
अड़गड़ा कहां है, मवेशियों की स्थिति क्या है?
संजय दास ने सवाल उठाया कि जब्त मवेशियों को अड़गड़ा के सुपुर्द करने के बाद उनकी निगरानी कौन करता है? क्या संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर यह सत्यापित करते हैं कि सभी मवेशी वहां सुरक्षित मौजूद हैं? यदि मवेशी वहां नहीं मिलते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? उन्होंने मांग की कि संबंधित अड़गड़ा के वास्तविक स्थान और वहां रखे गए मवेशियों की उपलब्धता की जांच कराई जाए।
संचालक से संपर्क नहीं होने की बात
संबंधित अड़गड़ा के संचालक से मामले में जानकारी लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। इस कारण अड़गड़ा के वास्तविक ठिकाने, मवेशियों के रखरखाव और उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर उनका पक्ष नहीं मिल सका। संबंधित संचालक का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
जब्ती सूची और सुपुर्दगी रजिस्टर की जांच की मांग
मामले में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मांग की गई है कि वे संबंधित अड़गड़ा पर पहुंचकर मवेशियों का भौतिक सत्यापन कराएं। जब्ती सूची, सुपुर्दगी रजिस्टर और मवेशियों की वर्तमान संख्या का मिलान किया जाए। यदि कोई मवेशी वहां मौजूद नहीं मिलता है, तो उसकी अनुपस्थिति का कारण पता लगाया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि यदि किसी मवेशी को छोड़ा गया है, तो किस आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे सुपुर्द किया गया।
भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी रोकने के लिए केवल मवेशियों को बरामद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जब्ती के बाद उनकी सुरक्षा और निगरानी भी जरूरी है। अब सवाल यह है कि संबंधित अधिकारी इस मामले की जांच कर मवेशियों की वास्तविक स्थिति और उनकी सुपुर्दगी से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे या नहीं।
















