बिरसिंहपुर पाली के स्वास्थ्य केंद्र का बुरा हाल मरीजों के लिए दवाइयों का अभाव
हम बात कर रहे हैं पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जो अपनी ही बेबसी का जिम्मेदार किसको ठहराए स्वयं नहीं जानता अगर डाक्टर साहब की बात करें तो डॉ. पुत्तू लाल सागर कभी-कभार आते हैं,और जो नय नवेले डाक्टर उपलब्ध है वो इतने एक्सपर्ट हैं की मैरिज की बीमारी सुनते ही मोबाइल में इलाज का तरीका और दवाईयां सर्च करने लगते हैं। अस्पताल में दबाईयां हैं तो ठीक वरना बाहर से दवाईयां लिख दी जाती है। अस्पताल का इतना बुरा हाल है कि महीनों से नहीं है रोल-बैंडेज,रोज 10से15पीस मार्केट से खरीदा जा रहा है। जो की पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए पर्याप्त नहीं है।अगर रोल पट्टी और मलहम घट जाय तो मरीज अपने गांव बिना ड्रेसिंग के ही वापस चला जाता है।या तो फिर परिजन रोल पट्टी और मलहम खरीद कर लाते हैं तब कहीं गाव में ड्रेसिंग संभव हो पाती है हाथ पांव मोंच दर्द के लिए नहीं है क्रैक बैंडेज
अधिकारी के दौरे पर ही दवाइयों और मूलभूत सुविधाओं से सजता है पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
बिरसिंहपुर –पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। ग्रामीणों और मरीजों ने आरोप लगाया है कि यहां पदस्थ स्वास्थ्य कर्मचारी पुत्तू लाल सागर नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते हैं, कभी-कभार ही ड्यूटी पर दिखाई देते हैं। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
*महीनों से नहीं है रोल-बैंडेज, पट्टी तक के लिए भटकते हैं मरीज*
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सबसे बुनियादी जरूरत रोल, बैंडेज और पट्टी ही महीनों से नहीं है। चोट लगने पर, एक्सीडेंट या छोटी सर्जरी के बाद मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से पट्टी खरीदनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन लाखों रुपये दवाइयों के लिए भेजता है, लेकिन पाली अस्पताल में हमेशा दवाइयों का टोटा बना रहता है। रजिस्टर में दवाइयां चढ़ा दी जाती हैं, लेकिन स्टॉक में नहीं मिलतीं।
*साहब आने वाले हैं, अस्पताल चमकाओ अभियान*
स्थानीय लोगों ने सबसे बड़ा आरोप दिखावे को लेकर लगाया है। बताया गया कि जब कभी कलेक्टर, एसडीएम, सीएमएचओ विधायक मंत्री सांसद या जिला स्तर के अधिकारियों का दौरा होता है, तो एक दिन पहले ही पूरे स्टाफ को सूचना दे दी जाती है। दौरे वाले दिन पूरा स्टाफ तय ड्रेस में, टोपी और नेम प्लेट के साथ तैयार मिलता है। पूरे अस्पताल की साफ-सफाई, चादरें बदलना, कचरा हटाना और दवाइयों को सजाकर रख दिया जाता है।
लेकिन जैसे ही अधिकारी जाते हैं, अगले दिन से फिर वही पुराना हाल हो जाता है। स्टाफ बिना ड्रेस के अस्पताल में दिखाई देते हैं, अस्पताल में गंदगी फैली नजर आती है, बेड पर गंदी चादरें होती है या फिर बेडशीट और तकिया न होतीही नहीं है और मरीजों द्वारा तकिया या चादर मांगने पर बदसलूकी आम बात है। ग्रामीणों का कहना है कि यह यह सब साफ सफाई दवाइयां का स्टॉक डॉक्टर का टाइम से मिलना सिर्फ अधिकारियों को दिखाने का नाटक है।
*पाली क्षेत्र की 70 हजार आबादी प्रभावित*
बिरसिंहपुर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पाली नगर सहित 44 से ज्यादा ग्राम पंचायतों के लगभग 50.000 हजार लोग निर्भर हैं। यहां रोजाना 150 से 200 मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही के कारण उन्हें जिला अस्पताल उमरिया या शहडोल रेफर कर दिया जाता है। गरीब आदिवासी मरीजों के पास न तो पैसे हैं और न ही साधन, मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। जिसके कारण संपूर्ण पाली क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है।
*जांच की मांग*
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर उमरिया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली का औचक जांच कराई जाए, दवा स्टॉक और उपस्थिति रजिस्टर का मिलान किया जाए। विशेष रूप से कर्मचारी और डाक्टर पुत्तू लाल सागर की उपस्थिति और दवाइयों की कमी की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच बिना पूर्व सूचना के की जाए, तभी अस्पताल की असली हकीकत सामने आ पाएगी। अगर समय रहते व्यवस्था मांग की है
बिरसिंहपुर पाली के स्वास्थ्य केंद्र का बुरा हाल मरीजों के लिए दवाइयों का अभाव
हम बात कर रहे हैं पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जो अपनी ही बेबसी का जिम्मेदार किसको ठहराए स्वयं नहीं जानता अगर डाक्टर साहब की बात करें तो डॉ. पुत्तू लाल सागर कभी-कभार आते हैं,और जो नय नवेले डाक्टर उपलब्ध है वो इतने एक्सपर्ट हैं की मैरिज की बीमारी सुनते ही मोबाइल में इलाज का तरीका और दवाईयां सर्च करने लगते हैं। अस्पताल में दबाईयां हैं तो ठीक वरना बाहर से दवाईयां लिख दी जाती है। अस्पताल का इतना बुरा हाल है कि महीनों से नहीं है रोल-बैंडेज,रोज 10से15पीस मार्केट से खरीदा जा रहा है। जो की पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए पर्याप्त नहीं है।अगर रोल पट्टी और मलहम घट जाय तो मरीज अपने गांव बिना ड्रेसिंग के ही वापस चला जाता है।या तो फिर परिजन रोल पट्टी और मलहम खरीद कर लाते हैं तब कहीं गाव में ड्रेसिंग संभव हो पाती है हाथ पांव मोंच दर्द के लिए नहीं है क्रैक बैंडेज
अधिकारी के दौरे पर ही दवाइयों और मूलभूत सुविधाओं से सजता है पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
बिरसिंहपुर –पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। ग्रामीणों और मरीजों ने आरोप लगाया है कि यहां पदस्थ स्वास्थ्य कर्मचारी पुत्तू लाल सागर नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते हैं, कभी-कभार ही ड्यूटी पर दिखाई देते हैं। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
*महीनों से नहीं है रोल-बैंडेज, पट्टी तक के लिए भटकते हैं मरीज*
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सबसे बुनियादी जरूरत रोल, बैंडेज और पट्टी ही महीनों से नहीं है। चोट लगने पर, एक्सीडेंट या छोटी सर्जरी के बाद मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से पट्टी खरीदनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन लाखों रुपये दवाइयों के लिए भेजता है, लेकिन पाली अस्पताल में हमेशा दवाइयों का टोटा बना रहता है। रजिस्टर में दवाइयां चढ़ा दी जाती हैं, लेकिन स्टॉक में नहीं मिलतीं।
*साहब आने वाले हैं, अस्पताल चमकाओ अभियान*
स्थानीय लोगों ने सबसे बड़ा आरोप दिखावे को लेकर लगाया है। बताया गया कि जब कभी कलेक्टर, एसडीएम, सीएमएचओ विधायक मंत्री सांसद या जिला स्तर के अधिकारियों का दौरा होता है, तो एक दिन पहले ही पूरे स्टाफ को सूचना दे दी जाती है। दौरे वाले दिन पूरा स्टाफ तय ड्रेस में, टोपी और नेम प्लेट के साथ तैयार मिलता है। पूरे अस्पताल की साफ-सफाई, चादरें बदलना, कचरा हटाना और दवाइयों को सजाकर रख दिया जाता है।
लेकिन जैसे ही अधिकारी जाते हैं, अगले दिन से फिर वही पुराना हाल हो जाता है। स्टाफ बिना ड्रेस के अस्पताल में दिखाई देते हैं, अस्पताल में गंदगी फैली नजर आती है, बेड पर गंदी चादरें होती है या फिर बेडशीट और तकिया न होतीही नहीं है और मरीजों द्वारा तकिया या चादर मांगने पर बदसलूकी आम बात है। ग्रामीणों का कहना है कि यह यह सब साफ सफाई दवाइयां का स्टॉक डॉक्टर का टाइम से मिलना सिर्फ अधिकारियों को दिखाने का नाटक है।
*पाली क्षेत्र की 70 हजार आबादी प्रभावित*
बिरसिंहपुर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पाली नगर सहित 44 से ज्यादा ग्राम पंचायतों के लगभग 50.000 हजार लोग निर्भर हैं। यहां रोजाना 150 से 200 मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही के कारण उन्हें जिला अस्पताल उमरिया या शहडोल रेफर कर दिया जाता है। गरीब आदिवासी मरीजों के पास न तो पैसे हैं और न ही साधन, मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। जिसके कारण संपूर्ण पाली क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है।
*जांच की मांग*
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर उमरिया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली का औचक जांच कराई जाए, दवा स्टॉक और उपस्थिति रजिस्टर का मिलान किया जाए। विशेष रूप से कर्मचारी और डाक्टर पुत्तू लाल सागर की उपस्थिति और दवाइयों की कमी की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच बिना पूर्व सूचना के की जाए, तभी अस्पताल की असली हकीकत सामने आ पाएगी। अगर समय रहते व्यवस्था मांग की है









