बन रहे 370.97 लाख के बालक छात्रावास बच्चों के लिए आवास या मौत का घर
छात्राओं और छात्रो के लिए बन रहे भवन निर्माण से पहले ही भ्रष्टाचार, टेडे पिलर मिट्टी में दफन अवैध मुरुम से कर दी फिलिंग
*बिरसिंहपुर पाली, उमरिया जिले की सबसे बड़ी शैक्षणिक परियोजनाओं में से एक, बिरसिंहपुर पाली के एकलव्य स्कूल के पास लोक निर्माण विभाग / PIU द्वारा बन रहे माडल स्कूल के छात्र छात्राओं के लिए 50 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास निर्माण में काम शुरू होने से पहले ही बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है स्वीकृत वर्ष 2025-26 और स्वीकृत राशि 370.97 लाख रुपये वाले इस छात्रावास के बेस में ही घोर लापरवाही बरती गई है। जहां अवैध मुरूम खोदी गई वहीं बिना अनुमति तेंदू, महुआ, छूल्हा सीजी जैसे हरे भरे केई पेडों को भी ठेकेदार द्वारा काटा गया।जिसकी जानकारी न तो पंचायत खोदी गई नहीं राजस्व नहीं वन विभाग खोदी गई।
पिलर को ही मिट्टी में दफना दिया, सिंचाई कैसे होगी
नियमानुसार पिलर और कॉलम बनने के बाद उसकी 21 दिन तक लगातार पानी से तराई (सिंचाई) करना अनिवार्य है, तभी कंक्रीट में मजबूती आती है। लेकिन यहां ठेकेदार ने केशर, टस्ट और पिलर बनाते ही उसे जेसीबी से निकली मिट्टी और मुरुम से ढकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जब पिलर ही मिट्टी में दफन हो गए तो उनकी तराई कैसे हो पाएगी? इससे पूरी बिल्डिंग की उम्र और गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है। यह सीधे-सीधे लाखों रुपये के भवन के साथ खिलवाड़ है।
*जेसीबी से लेवलिंग में पिलर टेढ़े हुए:*
दूसरी सबसे बड़ी लापरवाही यह कि बेस के चारों तरफ बराबर करने के लिए ठेकेदार ने भारी भरकम जेसीबी मशीन चला दी। जेसीबी के धक्के से कई पिलर मौके पर ही टेढ़े हो गए हैं। मौके की फोटो में साफ दिख रहा है कि पिलर अपनी जगह से खिसक गए हैं। ऐसे टेढ़े पिलर पर 2 मंजिला छात्रावास बनाना बच्चों की जान से खिलवाड़ है।
अवैध मुरुम से फिलिंग, प्रशासन बना मूकदर्शक
सबसे बड़ा मामला अवैध उत्खनन का है। ठेकेदार ने बाहर से मुरुम खरीदने के बजाय छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर शासकीय खाता नंबर 582/1 ग्राम बरबसपुर की जमीन से 916.5 घन मीटर मुरुम का अवैध खनन करा लिया।
23/10/2026 को एसडीएम से शिकायत के बाद तहसीलदार, खनिज विभाग और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे। मौके पर दो ट्रैक्टर क्रमांक MP54A 6751 और MP18AB 3009 और एक जेसीबी MP54A8682 मुरुम खोदे हुए ठूली हुई मुरूम रंगे हाथों पकड़ी गई। ठेकेदार के मुंशी, जेसीबी मालिक और ट्रैक्टर मालिक प्रेमा नायक ने पंचनामे में कबूल भी किया कि मुरुम इसी छात्रावास की फिलिंग के लिए खोदी जा रही है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि मौके पर मौजूद तहसीलदार ने कहा कि हम केवल पंचनामा बना सकते हैं, खाली गाड़ियों की जप्ती नहीं बना सकते। जबकि नियमानुसार अवैध खनन में लगी जेसीबी और ट्रैक्टरों पर खनिज अधिनियम के तहत 2 से 5 लाख तक का जुर्माना और FIR का प्रावधान है। केवल पंचनामा बनाकर छोड़ देना, पाली तहसील में ठेकेदारों को खुला संरक्षण देने जैसा है।
*पाली तहसील में ठेकेदारों का पुराना खेल:*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाली तहसील में यह कोई नया मामला नहीं है। हर बड़े ठेके में ठेकेदार इसी तरह शासकीय जमीन से अवैध मुरुम, गिट्टी खोदकर अपना काम पूरा कर चले जाते हैं और बाद में बिल पूरा पास करा लेते हैं। खनिज, राजस्व, PIU और PWD विभाग की मिलीभगत से किसी भी ठेकेदार पर आज तक बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है।
अब सवाल यह है कि क्या कलेक्टर उमरिया और लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री इस 370.97 लाख के छात्रावास की गुणवत्ता की जांच कराएंगे? क्या टेढ़े पिलरों को तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा? और क्या अवैध मुरुम खनन पर ठेकेदार से रॉयल्टी वसूल कर उसकी गाड़ियां जप्त की जाएंगी?
बन रहे 370.97 लाख के बालक छात्रावास बच्चों के लिए आवास या मौत का घर
छात्राओं और छात्रो के लिए बन रहे भवन निर्माण से पहले ही भ्रष्टाचार, टेडे पिलर मिट्टी में दफन अवैध मुरुम से कर दी फिलिंग
*बिरसिंहपुर पाली, उमरिया जिले की सबसे बड़ी शैक्षणिक परियोजनाओं में से एक, बिरसिंहपुर पाली के एकलव्य स्कूल के पास लोक निर्माण विभाग / PIU द्वारा बन रहे माडल स्कूल के छात्र छात्राओं के लिए 50 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास निर्माण में काम शुरू होने से पहले ही बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है स्वीकृत वर्ष 2025-26 और स्वीकृत राशि 370.97 लाख रुपये वाले इस छात्रावास के बेस में ही घोर लापरवाही बरती गई है। जहां अवैध मुरूम खोदी गई वहीं बिना अनुमति तेंदू, महुआ, छूल्हा सीजी जैसे हरे भरे केई पेडों को भी ठेकेदार द्वारा काटा गया।जिसकी जानकारी न तो पंचायत खोदी गई नहीं राजस्व नहीं वन विभाग खोदी गई।
पिलर को ही मिट्टी में दफना दिया, सिंचाई कैसे होगी
नियमानुसार पिलर और कॉलम बनने के बाद उसकी 21 दिन तक लगातार पानी से तराई (सिंचाई) करना अनिवार्य है, तभी कंक्रीट में मजबूती आती है। लेकिन यहां ठेकेदार ने केशर, टस्ट और पिलर बनाते ही उसे जेसीबी से निकली मिट्टी और मुरुम से ढकवा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जब पिलर ही मिट्टी में दफन हो गए तो उनकी तराई कैसे हो पाएगी? इससे पूरी बिल्डिंग की उम्र और गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है। यह सीधे-सीधे लाखों रुपये के भवन के साथ खिलवाड़ है।
*जेसीबी से लेवलिंग में पिलर टेढ़े हुए:*
दूसरी सबसे बड़ी लापरवाही यह कि बेस के चारों तरफ बराबर करने के लिए ठेकेदार ने भारी भरकम जेसीबी मशीन चला दी। जेसीबी के धक्के से कई पिलर मौके पर ही टेढ़े हो गए हैं। मौके की फोटो में साफ दिख रहा है कि पिलर अपनी जगह से खिसक गए हैं। ऐसे टेढ़े पिलर पर 2 मंजिला छात्रावास बनाना बच्चों की जान से खिलवाड़ है।
अवैध मुरुम से फिलिंग, प्रशासन बना मूकदर्शक
सबसे बड़ा मामला अवैध उत्खनन का है। ठेकेदार ने बाहर से मुरुम खरीदने के बजाय छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर शासकीय खाता नंबर 582/1 ग्राम बरबसपुर की जमीन से 916.5 घन मीटर मुरुम का अवैध खनन करा लिया।
23/10/2026 को एसडीएम से शिकायत के बाद तहसीलदार, खनिज विभाग और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे। मौके पर दो ट्रैक्टर क्रमांक MP54A 6751 और MP18AB 3009 और एक जेसीबी MP54A8682 मुरुम खोदे हुए ठूली हुई मुरूम रंगे हाथों पकड़ी गई। ठेकेदार के मुंशी, जेसीबी मालिक और ट्रैक्टर मालिक प्रेमा नायक ने पंचनामे में कबूल भी किया कि मुरुम इसी छात्रावास की फिलिंग के लिए खोदी जा रही है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि मौके पर मौजूद तहसीलदार ने कहा कि हम केवल पंचनामा बना सकते हैं, खाली गाड़ियों की जप्ती नहीं बना सकते। जबकि नियमानुसार अवैध खनन में लगी जेसीबी और ट्रैक्टरों पर खनिज अधिनियम के तहत 2 से 5 लाख तक का जुर्माना और FIR का प्रावधान है। केवल पंचनामा बनाकर छोड़ देना, पाली तहसील में ठेकेदारों को खुला संरक्षण देने जैसा है।
*पाली तहसील में ठेकेदारों का पुराना खेल:*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाली तहसील में यह कोई नया मामला नहीं है। हर बड़े ठेके में ठेकेदार इसी तरह शासकीय जमीन से अवैध मुरुम, गिट्टी खोदकर अपना काम पूरा कर चले जाते हैं और बाद में बिल पूरा पास करा लेते हैं। खनिज, राजस्व, PIU और PWD विभाग की मिलीभगत से किसी भी ठेकेदार पर आज तक बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है।
अब सवाल यह है कि क्या कलेक्टर उमरिया और लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री इस 370.97 लाख के छात्रावास की गुणवत्ता की जांच कराएंगे? क्या टेढ़े पिलरों को तोड़कर दोबारा बनाया जाएगा? और क्या अवैध मुरुम खनन पर ठेकेदार से रॉयल्टी वसूल कर उसकी गाड़ियां जप्त की जाएंगी?











