- अध्यात्म/कर्मयोग और महाभारत :* सत्ता को षड्यंत्र के द्वारा अपहरण करने पर कौरवों को पराजित करने की सलाह देने का कारण बताते हुए अर्जुन से भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं-
- महापुरुष जो-जो आचरण करते हैं, सामान्य जन उसी का अनुसरण करते हैं:
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥ 3.21 ॥”
दुर्केश सिंह, संपादकीय प्रभारी नजरिया न्यूज,29 सितंबर 2026
मुझे युद्ध करने के लिए क्यों कह रहे हैं, मुझे राजा नहीं बनना है। इस सवाल का उत्तर देते हुए भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद्भागवत गीता, अध्याय 3, कर्मयोग के 21वें श्लोक में कहते हैं:
आचरण से समाज ज्यादा सीखता हैं- नेता या मार्गदर्शक या न्यायपालिका या कार्यपालिका के प्रतिनिधि जैसा व्यवहार करेंगे, समाज भी अनजाने में वही करेगा।
इससे पूर्व श्रीमद्भागवत गीता, कर्मयोग- श्लोक 3.20 में भगवान श्रीकृष्ण राजाओं के आचरण का उदाहरण देते हुए अर्जुन से कहते हैं-जनक जैसे राजाओं ने केवल नियत कर्म करने से ही सिद्धि प्राप्त की। अतः सामान्यजनों को शिक्षित करने की दृष्टि से हे अर्जुन तुम्हें कौरवों से युद्ध करना चाहिए।



















